Mumbai Rain Flood Budget Failure: Flooded streets and railway tracks in Mumbai after heavy monsoon rain despite ₹25,000 crore monsoon budget. (PC - Live Hindustan)
Mumbai Rain Flood Budget Failure: महाराष्ट्र में मानसून ने एक बार फिर कहर बरपाया है। मुंबई, ठाणे, पालघर, नवी मुंबई और पुणे समेत कई शहरों में मूसलाधार बारिश ने जिंदगी अस्त-व्यस्त कर दी है। मुंबई में बारिश और बाढ़ के बजट में विफलता (Mumbai Rain Flood Budget Failure) अब सिर्फ मौसम की रिपोर्ट नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकारी तैयारियों और एडमिनिस्ट्रेटिव दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान बन गई है। हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी शहर की सड़कें, रेलवे ट्रैक और रिहायशी इलाके पानी में डूबे हुए मिले।
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25,000 करोड़ का बजट, फिर भी सिस्टम क्यों हुआ फेल?
मुंबई को मानसून से बचाने के लिए करोड़ों रुपये का बजट दिया गया था। नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने और पानी भरने से रोकने के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही बड़ी बारिश ने इन दावों की असलियत सामने ला दी। मुंबई में बारिश और बाढ़ के बजट में विफलता (Mumbai Rain Flood Budget Failure) इस बात की ओर इशारा करता है कि सिर्फ बजट देना काफी नहीं है, इसका सही इस्तेमाल और समय पर लागू करना भी जरूरी है।
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बारिश बनी जानलेवा, गई कई जानें
अब तक भारी बारिश की वजह से 13 लोगों की मौत हो चुकी है। मानखुर्द इलाके में एक चॉल गिरने से कई परिवार तबाह हो गए। तेज हवाओं ने सैकड़ों पेड़ भी उखाड़ दिए, जिससे कई इलाकों में बिजली और ट्रैफिक में रुकावट आई। राहत और बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन लगातार बारिश ने बचाव काम को मुश्किल बना दिया है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लैंडस्लाइड से बढ़ी चिंता
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर लैंडस्लाइड ने इंजीनियरिंग की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं। लगभग ₹6,695 करोड़ की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की तारीफ मॉडर्न इंजीनियरिंग की मिसाल के तौर पर की गई थी, लेकिन टनल के पास लैंडस्लाइड की वजह से ट्रैफिक रोकना पड़ा, जो इसकी पहली बड़ी चुनौती थी। मुंबई में बारिश और बाढ़ के बजट में विफलता (Mumbai Rain Flood Budget Failure) की चर्चा अब शहर तक ही सीमित नहीं है, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी जांच के दायरे में हैं।
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रेलवे, सड़कें और रिहायशी इलाके बने तालाब (Mumbai Rain Flood Budget Failure)
मुंबई और पालघर में कई रेलवे ट्रैक डूब गए, जिससे लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों का ऑपरेशन रुक गया। वसई-विरार और नालासोपारा जैसे इलाकों में सड़कें नदियों जैसी दिखीं। कई ट्रेनें कैंसिल करनी पड़ीं और कई के रूट डायवर्ट कर दिए गए। लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई।
क्या क्लाइमेट चेंज ही है इसकी अकेली वजह?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। मुंबई में अब उतनी बारिश हो रही है जितनी पहले पूरे महीने में होती थी, वह कुछ ही घंटों में हो जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर का ड्रेनेज सिस्टम इस नई चुनौती से निपटने के लिए डेवलप किया गया है? मुंबई में बारिश और बाढ़ के बजट में विफलता (Mumbai Rain Flood Budget Failure) इस बहस को और हवा दे रहा है कि प्राकृतिक आपदाओं के अलावा, एडमिनिस्ट्रेटिव कमियां भी इस संकट में योगदान दे रही हैं।
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विपक्ष ने सरकार और BMC पर साधा निशाना (Mumbai Rain Flood Budget Failure)
विपक्ष का आरोप है कि हर साल मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद, जमीनी हालात वैसे ही हैं। सिर्फ एडवाइजरी जारी करना और लोगों को घर के अंदर रहने की सलाह देना इसका हल नहीं है। अगर नालों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम और कंस्ट्रक्शन का काम समय पर पूरा हो जाता, तो नुकसान को काफी कम किया जा सकता था।
शहरी विकास मॉडल पर उठे गंभीर सवाल
मुंबई की इस दुखद घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिर्फ बजट बढ़ाने से समस्या का हल नहीं होता। मुंबई में बारिश और बाढ़ के बजट में विफलता (Mumbai Rain Flood Budget Failure) देश के सबसे बड़े मेट्रोपोलिस में अकाउंटेबिलिटी, ट्रांसपेरेंसी और बेहतर अर्बन प्लानिंग की जरूरत को दिखाता है। अगर एडमिनिस्ट्रेशन, BMC और सरकार ने इस बार सबक नहीं सीखा, तो आने वाले सालों में हर मानसून में यही सिचुएशन दोहराई जाएगी।

