Parwanoo gets second place in the country in Clean Air Survey 2025, Himachal's efforts get national recognition

Clean Air Survey 2025: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक कस्बे परवाणू ने देशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर परवाणू को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में देश का दूसरा सर्वश्रेष्ठ शहर घोषित किया गया है। यह उपलब्धि उस श्रेणी में हासिल हुई है, जहां तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों का मूल्यांकन किया गया था।
देवास पहले और परवाणू दूसरे स्थान पर
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से घोषित परिणामों में बताया गया कि मध्य प्रदेश का देवास इस श्रेणी में पहले स्थान पर रहा। वहीं, हिमाचल का परवाणू दूसरे और कई अन्य छोटे शहर इस सूची में आगे रहे। यह रैंकिंग केवल पुरस्कार ही नहीं बल्कि उन शहरों के लिए मान्यता है, जिन्होंने वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
नई दिल्ली में हुआ सम्मान समारोह
नई दिल्ली में आयोजित स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार समारोह में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने परवाणू को यह पुरस्कार प्रदान किया। समारोह में कई राज्यों और नगरों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीपीसीबी) की ओर से कहा गया कि यह सम्मान परवाणू प्रशासन, स्थानीय निकायों और नागरिकों की संयुक्त मेहनत का परिणाम है।
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25 लाख रुपये का प्रोत्साहन
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से हिमाचल प्रदेश को नवाचार और बेहतर क्रियान्वयन के लिए 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया है। यह राशि वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने से संबंधित भविष्य की परियोजनाओं में खर्च की जाएगी। एचपीपीसीबी ने कहा है कि इस धनराशि का इस्तेमाल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करने और हरित पहल को बढ़ावा देने में किया जाएगा।
क्या है स्वच्छ वायु सर्वेक्षण?
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत हर साल आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में उठाए गए कदमों का मूल्यांकन करना है।
यह सर्वेक्षण 130 शहरों में किया जाता है।
मूल्यांकन बहु-स्तरीय और कठोर मानकों पर आधारित होता है।
इसमें वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), प्रदूषण घटाने के उपाय, नागरिक सहभागिता और तकनीकी नवाचारों को शामिल किया जाता है।
पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, इस प्रतियोगिता का मकसद शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना है ताकि हर जगह तेजी से वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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परवाणू की उपलब्धियां
परवाणू लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रहा था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले हैं।
औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाने के लिए बाध्य किया गया।
नगर निकायों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और धूल नियंत्रण उपायों को लागू किया।
नागरिकों को जागरूक करने के लिए ‘स्वच्छ वायु अभियान’ चलाए गए।
हरित क्षेत्र बढ़ाने और सड़कों पर पानी का छिड़काव जैसी गतिविधियों से धूल प्रदूषण कम किया गया।
एचपीपीसीबी के प्रवक्ता ने कहा कि इन प्रयासों के कारण परवाणू की हवा में सकारात्मक बदलाव आया और शहर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पाने में सफल रहा।
नागरिकों की भागीदारी अहम
परवाणू को यह सम्मान केवल सरकारी नीतियों से नहीं मिला, बल्कि नागरिकों की जागरूकता और सहयोग ने भी अहम भूमिका निभाई। स्थानीय लोगों ने खुले में कचरा जलाने से परहेज किया, वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण कराया और हरियाली को बढ़ावा दिया। यह सामूहिक प्रयास ही शहर को इस मुकाम तक लाया।
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हिमाचल के लिए गर्व का क्षण
हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि यह पुरस्कार राज्य के लिए गर्व का विषय है। प्रदेश के अन्य शहरों को भी परवाणू से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में शिमला, सोलन और मंडी जैसे अन्य कस्बों को भी इस सूची में शामिल किया जाए।
भविष्य की दिशा
25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि से परवाणू में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए और भी योजनाएं चलाई जाएंगी। इनमें आधुनिक मॉनिटरिंग स्टेशन लगाना, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण को सख्ती से लागू करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शामिल है। साथ ही, नागरिकों को प्रदूषण कम करने में भागीदार बनाने के लिए जागरूकता अभियान और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

