PM Modi Japan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन से टोक्यो से सेंडाई पहुँचे। यह यात्रा न केवल भारत-जापान के गहरे रिश्तों का प्रतीक बनी, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को नई दिशा देने वाली साबित हुई।
बुलेट ट्रेन यात्रा बनी दोस्ती का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा ने शिंकानसेन बुलेट ट्रेन से यात्रा की, जो जापान की तेज़ रफ्तार और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक मानी जाती है। यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की सहजता और आपसी संवाद ने यह संदेश दिया कि भारत और जापान की दोस्ती अब औपचारिक संबंधों से आगे बढ़कर एक मजबूत साझेदारी का रूप ले रही है। इशिबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंडाई. कल रात से जारी, मैं आपके साथ कार में रहूंगा।”
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औद्योगिक सुविधाओं का दौरा
सेंडाई पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कई अहम औद्योगिक स्थलों का निरीक्षण किया। इनमें बुलेट ट्रेन कोच निर्माण केंद्र और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर संयंत्र प्रमुख रहे। यह दौरा भारत-जापान सहयोग को केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रखता, बल्कि तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में साझेदारी को भी सशक्त करता है।
जापान का सबसे बड़ा चिप संयंत्र
मियागी प्रांत के ओहिरा गांव में स्थित सेमीकंडक्टर संयंत्र का विकास ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन (PSMC), जापानी साझेदारों और एसबीआई होल्डिंग्स के सहयोग से जापान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (JSMC) नामक संयुक्त उद्यम के तहत किया जा रहा है।
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यह संयंत्र जापान की घरेलू चिप निर्माण क्षमता को पुनर्जीवित करने का सबसे बड़ा प्रयास माना जा रहा है। संयंत्र में 12-इंच सेमीकंडक्टर वेफर्स का उत्पादन किया जाएगा। शुरुआती चरण में 40-नैनोमीटर तकनीक का इस्तेमाल होगा, जबकि आगे चलकर 28 और 55 नैनोमीटर नोड्स तक विस्तार करने की योजना है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र को बड़ा लाभ
इस चिप संयंत्र का मुख्य फोकस ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स पर होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों और नई पीढ़ी के मोबिलिटी समाधानों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह संयंत्र जापान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अहम भूमिका निभा सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि संयंत्र शुरू होने के बाद हर महीने लगभग 40,000 वेफर्स का उत्पादन होगा। इससे जापान की घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी और विदेशी निर्भरता कम होगी।
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भारत-जापान रिश्तों में नई ऊर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और जापान दोनों मिलकर 21वीं सदी के तकनीकी नेतृत्व को नया आकार दे सकते हैं। भारत जहां एक बड़े उपभोक्ता बाजार और तकनीकी प्रतिभा का घर है, वहीं जापान अपनी उन्नत तकनीक और प्रबंधन क्षमता के लिए जाना जाता है। दोनों के सहयोग से न केवल उद्योग जगत को फायदा होगा, बल्कि युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।
चीन में एससीओ सम्मेलन के लिए रवाना
जापान यात्रा पूरी करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी सीधे चीन के तियानजिन रवाना हो गए हैं। वे 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सात साल बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा है, जिससे इस सम्मेलन को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह जापान यात्रा सिर्फ औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग का मजबूत संदेश भी लेकर आई। सेंडाई में सेमीकंडक्टर संयंत्र और बुलेट ट्रेन परियोजना के दौरे ने साफ कर दिया कि भारत और जापान मिलकर न सिर्फ आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि आने वाले भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो रहे हैं।

