Punjab SDRF Fund: 12,000 करोड़ के एसडीआरएफ फंड पर पंजाब में सियासी तूफान, कैग रिपोर्ट Vs सीएम मान के दावे!

Punjab SDRF Fund: पंजाब में एसडीआरएफ (State Disaster Response Fund) को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच इस फंड को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। सवाल ये उठता है कि क्या वाकई पंजाब सरकार के पास 12,000 करोड़ रुपये के आपदा राहत फंड हैं, या फिर ये सिर्फ एक राजनीतिक भ्रम है?
क्या है विवाद की जड़?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह जनता को गुमराह कर रही है। उनका कहना है कि पिछले 15 वर्षों में पंजाब को एसडीआरएफ के तहत केवल 5,012 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से 3,820 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि “12 हजार करोड़” की बात पूरी तरह से झूठ और भ्रामक है।
मान ने कहा, “यह झूठ फैलाया जा रहा है कि पंजाब सरकार के पास एसडीआरएफ का बहुत सारा पैसा पड़ा है, जबकि हकीकत इसके उलट है। बीजेपी सिर्फ इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है।”
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बीजेपी का पलटवार – CAG रिपोर्ट के आंकड़े
दूसरी ओर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च 2024 तक पंजाब सरकार के पास एसडीआरएफ में 10,380.41 करोड़ रुपये जमा थे। उन्होंने दावा किया कि 2023 में ये राशि 9,041.74 करोड़ रुपये थी।
जाखड़ का आरोप है कि राज्य सरकार ने केंद्र के दिशानिर्देशों के खिलाफ जाकर इस फंड को खर्च नहीं किया और अब इसे लेकर झूठा प्रचार कर रही है। उन्होंने कहा कि 2024-25 और 2025-26 के आवंटन को जोड़ने पर कुल राशि 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
उन्होंने कहा, “मुख्य सचिव ने भी इस राशि के मौजूद होने की पुष्टि की है। आम आदमी पार्टी की सरकार को जनता से माफी मांगनी चाहिए और इस फंड का सही इस्तेमाल करते हुए राहत पहुंचानी चाहिए।”
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सीएम मान का केंद्र पर बड़ा हमला
सीएम भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र जानबूझकर पंजाब को तंग कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास निधि (RDF) और जीएसटी का बकाया फंसा हुआ है।
मान ने कहा, “हम कोई अतिरिक्त फंड नहीं मांग रहे, बल्कि 60,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं जो पंजाब का हक है। अगर केंद्र यह जारी कर दे तो हम सुप्रीम कोर्ट से केस भी वापस ले लेंगे।”
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राजनीतिक संदेश और आगे की राह
इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति गरमा गई है और जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच यह तकरार किस दिशा में जाती है और असलियत क्या सामने आती है।

