Supreme Court on SIR: क्या रुक सकती है बिहार की एसआईआर प्रक्रिया? सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा संकेत!

Supreme Court on SIR: बिहार में चल रही एसआईआर (स्लिपिंग इलेक्टर्स रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग भले ही एक संवैधानिक संस्था हो, लेकिन अगर बिहार में एसआईआर को लेकर किसी भी तरह की कानूनी गड़बड़ी सामने आती है, तो उसे रद्द किया जा सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों के जवाब में दी।
कोर्ट ने एसआईआर पर रोक की मांग की खारिज
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को मनमाने ढंग से चला रहा है और 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की योजना बना रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा, “एसआईआर एक चुनावी प्रक्रिया है, इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती।” साथ ही यह भी जोड़ा कि यदि अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद किसी प्रकार की कानूनी अनियमितता पाई जाती है, तो उसे रद्द करने का अधिकार कोर्ट के पास सुरक्षित रहेगा।
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आधार को दस्तावेज़ मानने पर उठा सवाल
कोर्ट के 8 सितंबर के उस आदेश को भी चुनौती दी गई जिसमें आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार्य माना गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, “आधार नागरिकता, उम्र या निवास का प्रमाण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के छह फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में एक लाख से अधिक रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं, जिन्हें कानून के तहत आधार मिल सकता है।
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7 अक्टूबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने आधार को फिलहाल “अंतरिम व्यवस्था” के रूप में मान्य बताया और इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है। इस दौरान अदालत यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि उसके निर्देश बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर लागू होंगे।
तेज़ सुनवाई की मांग
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और आरजेडी की ओर से प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता नहीं बरत रहा है और एसआईआर में गंभीर खामियां हैं, इसलिए इस पर तेजी से सुनवाई होनी चाहिए। वहीं, आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक सुनवाई टाल दी जाए।
बिहार एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कोई अंतिम फैसला न दिया हो, लेकिन उसकी टिप्पणी ने साफ कर दिया है कि अगर कोई कानूनी चूक पाई जाती है तो पूरी प्रक्रिया को रद्द करने से वह पीछे नहीं हटेगा। आने वाली सुनवाई पर देश भर की निगाहें टिकी हैं।

