Murmu Tribute to Mahatma Gandhi: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर राजघाट पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की
Murmu Tribute to Mahatma Gandhi: देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज राजधानी दिल्ली के राजघाट में श्रद्धा और मौन का वातावरण देखने को मिला। द्रौपदी मुर्मू ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर राष्ट्र ने एक बार फिर बापू के सत्य, अहिंसा और नैतिक मूल्यों को स्मरण किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उस विचारधारा को नमन था जिसने भारत की आत्मा को दिशा दी। राजघाट परिसर में सादगी, अनुशासन और मौन अपने-आप में गांधी जी के जीवन दर्शन की याद दिला रहे थे।
राजघाट – जहां मौन भी संदेश देता है
राजघाट केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की चेतना का प्रतीक है। यहीं से गांधी जी के विचारों की गूंज आज भी देश-दुनिया को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाती है। राष्ट्रपति ने जब समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित किए, तो वह क्षण पूरे राष्ट्र के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक बन गया। राजघाट में उपस्थित अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों ने भी गांधी जी को नमन किया। वातावरण पूरी तरह शांत था, मानो हर व्यक्ति आत्ममंथन में डूबा हो।
राष्ट्रपति का संदेश – गांधी आज भी प्रासंगिक
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थे। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, सहिष्णुता और नैतिक साहस ही किसी भी मजबूत लोकतंत्र की नींव होते हैं। राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में गांधी के विचार पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं – चाहे वह हिंसा का समाधान हो या सामाजिक विभाजन का।
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78वीं पुण्यतिथि – इतिहास और वर्तमान का संगम
महात्मा गांधी की पुण्यतिथि केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य को दिशा देने का अवसर भी है। 30 जनवरी 1948 को राष्ट्रपिता का बलिदान भारत के इतिहास का सबसे दुखद अध्याय रहा, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं। हर वर्ष इस दिन देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, प्रार्थना बैठकें और विचार गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। राष्ट्रपति द्वारा राजघाट पर श्रद्धांजलि देना इस बात का संकेत है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद भी गांधी के आदर्शों को सर्वोपरि मानता है।
सत्य और अहिंसा – गांधी का अमर मंत्र
महात्मा गांधी ने भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को यह सिखाया कि बिना हिंसा के भी बड़े से बड़ा संघर्ष जीता जा सकता है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि नैतिक शक्ति, शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है। आज जब दुनिया युद्ध, तनाव और असहिष्णुता से जूझ रही है, तब गांधी का संदेश और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। राष्ट्रपति की श्रद्धांजलि इसी संदेश को दोहराने का प्रतीक बनी।
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युवाओं के लिए गांधी का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में यह भी कहा कि देश के युवाओं को गांधी के विचारों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा सत्य और अहिंसा को अपने जीवन में अपनाएं, तो भारत न केवल आर्थिक बल्कि नैतिक रूप से भी विश्वगुरु बन सकता है। गांधी जी का जीवन सादगी, आत्मसंयम और सेवा का पाठ पढ़ाता है – जो आज के उपभोक्तावादी युग में और भी आवश्यक हो गया है।
राष्ट्र की सामूहिक श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति की इस श्रद्धांजलि के साथ ही देशभर से महात्मा गांधी को याद करने की तस्वीरें सामने आईं। स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों में बापू को नमन किया गया। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक सतत जिम्मेदारी है, जिसे गांधी के आदर्शों पर चलकर ही निभाया जा सकता है।
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