Purai village girls practicing swimming in a pond after winning national and international medals

Chhattisgarh swimming talent: कड़ी मेहनत, अनुशासन और कभी हार न मानने की जिद अगर हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का छोटा सा गांव पुरई आज इसी जज्बे की मिसाल बन चुका है। यहां की बेटियां गांव के तालाब में अभ्यास कर तैराकी में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रही हैं और पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।
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खिलाड़ियों का गांव बन चुका है पुरई
पुरई गांव अब खिलाड़ियों वाला गांव कहलाने लगा है। यहां की अधिकतर बेटियां पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी सक्रिय हैं। कोई तैराकी में दर्जनों पदक जीत चुकी है, तो कोई खो-खो और कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। गांव के तालाब में रोज सुबह-शाम घंटों अभ्यास करने वाली ये बेटियां बताती हैं कि संसाधन भले सीमित हों, लेकिन उनके सपने बड़े हैं।
तालाब में प्रैक्टिस, लेकिन हौसले बुलंद
इन बेटियों के पास आज भी स्वीमिंग पूल की सुविधा नहीं है। मजबूरी में उन्हें तालाब में ही अभ्यास करना पड़ता है, जो कई बार जोखिम भरा भी होता है। इसके बावजूद उनका आत्मविश्वास कम नहीं होता। हर प्रतियोगिता के बाद वे अगला लक्ष्य तय करती हैं, गोल्ड मेडल।
एशियन प्रतियोगिता तक पहुंची वैशाली
तैराक वैशाली बंजारे का चयन एशियाई तैराकी प्रतियोगिता के लिए हो चुका है। वैशाली बताती हैं कि उन्होंने इसी तालाब में अभ्यास कर अब तक कई नेशनल गोल्ड मेडल जीते हैं। उनका सपना है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करें, लेकिन इसके लिए आधुनिक स्वीमिंग पूल और बेहतर ट्रेनिंग सुविधा बेहद जरूरी है।
कोचों का अनुभव, बेटियों की ताकत
करीब 15 सालों से तैराकी सिखा रहे कोच ओम प्रकाश ओझा कहते हैं कि सीमित संसाधनों में भी पुरई की बेटियों ने कई नेशनल और एशियन लेवल रिकॉर्ड बनाए हैं। गांव की दो लड़कियों ने तो तालाब में 8 घंटे और 5 घंटे लगातार तैराकी कर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया है। वहीं, कोच निशा ओझा कहती हैं कि तालाब में ट्रेनिंग देना सुरक्षित नहीं है, लेकिन विकल्प न होने के कारण यही करना पड़ता है। यदि प्रशासन सहयोग करे, तो ये बेटियां देश के लिए और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं।
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स्वीमिंग पूल की मांग, गांव एकजुट
खिलाड़ियों और कोचों की मुख्य मांग स्वीमिंग पूल की है। इसे देखते हुए अब गांव के लोग भी आगे आए हैं। ग्रामीण मिलकर स्वीमिंग पूल निर्माण की योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि बेटियों की प्रतिभा को सही मंच मिल सके। गांव वालों का कहना है कि वे हर आर्थिक कठिनाई का सामना करने को तैयार हैं, बस उनकी बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
पुरई गांव की ये बेटियां साबित कर रही हैं कि अगर हौसले मजबूत हों, तो तालाब से भी इंटरनेशनल स्टेज तक का सफर तय किया जा सकता है।

