Rabri Devi Bungalow Controversy: 1 एकड़ से 3 एकड़ का बंगला, फिर भी नाराज RJD! आखिर असली खेल क्या है?

Rabri Devi Bungalow Controversy: बिहार की सियासत इन दिनों किसी बयान, गठबंधन या चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक सरकारी बंगले को लेकर गर्माई हुई है। राजनीतिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह चर्चा सिर्फ इस बात की हो रही है कि आखिर 10 सर्कुलर रोड वाले उस प्रतिष्ठित आवास को क्यों खाली कराया जा रहा है, जो दशकों से लालू परिवार का राजनीतिक केंद्र रहा है। नीतीश कुमार की सरकार कह रही है कि राबड़ी देवी को उनकी ‘स्थिति और प्रोटोकॉल’ के अनुरूप बड़ा और आधुनिक बंगला दिया जा रहा है, लेकिन राजद इसे राजनीतिक संदेश और ‘कद कम करने की कोशिश’ बता रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 6 महीने के भीतर 10 सर्कुलर रोड खाली कर 39 हार्डिंग रोड स्थित नए आवास में जाना होगा। सरकार इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया कह रही है, जबकि राजद ने साफ कहा, ‘राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करेंगी।’ इस मामले ने बिहार की राजनीति को अचानक हिला दिया है, क्योंकि सवाल अब सिर्फ आवास का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का हो गया है।
क्या है राबड़ी देवी बंगला विवाद की जड़?
राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की नई भूमिका के तहत नीतीश सरकार ने 39 हार्डिंग रोड स्थित एक बड़ा और आधुनिक बंगला आवंटित किया है। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक यह आवास स्पष्ट रूप से एक अपग्रेड है जहां पहले उनका बंगला 1 एकड़ का था, वहीं नया आवास 3 एकड़ में फैला है। इसमें 6 विशाल बेडरूम, दो मंजिला मुख्य भवन, कॉन्फ्रेंस रूम, बड़ा ऑफिस स्पेस, सुरक्षा चौकी, स्टाफ क्वार्टर, CCTV सिस्टम, बड़ा गार्डन और किचन स्पेस जैसी हाई-प्रोफाइल सुविधाएं मौजूद हैं। सरकार का तर्क है कि यह बदलाव पूरी तरह प्रोटोकॉल आधारित है ऊंचा पद, बड़ा आवासट’किन असली सवाल यही है कि इतने बड़े और आधुनिक बंगले के बावजूद राजद इसके खिलाफ क्यों है?
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यह सम्मान नहीं, सियासी संदेश है?
राजद नेताओं का दावा है कि मुद्दा यह नहीं कि बंगला बड़ा है या छोटा, बल्कि यह राजनीतिक दूरी बढ़ाने का प्रयास है। पार्टी अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल के शब्दों में’यह महज आवास आवंटन नहीं, राजनीतिक संकेत है। सत्ता बदलने के बाद लालू परिवार को साइडलाइन करने की कोशिश हो रही है।’ 10 सर्कुलर रोड जहां से लालू यादव ने वर्षों तक सियासत चलाई, वह अब ‘प्रतीक’ बन चुका है उसे छोड़ना राजद को ‘छवि कम करने’ जैसा लग रहा है।
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सरकार का ‘प्रोटोकॉल तर्क’
सरकार का तर्क साफ है कि राबड़ी देवी को 39 हार्डिंग रोड वाला नया बंगला देना पूरी तरह नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत है, न कि राजनीति से प्रेरित। विभागीय मंत्री विजय चौधरी ने दो टूक कहा कि बिहार में पांच संवैधानिक पद होते हैं, चार पहले से निर्धारित हैं और पांचवें के लिए यह आवंटन सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। उनका कहना है कि नया बंगला आकार में बड़ा, सुविधाओं में आधुनिक और लोकेशन के लिहाज से बेहद रणनीतिक है एक तरफ विधानसभा ठीक सामने है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री आवास मात्र 800 मीटर दूरी पर। लेकिन जहां प्रशासनिक तर्क प्रक्रिया को सही ठहराते हैं, वहीं बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसी आवंटन के सियासी मायने विपक्ष के लिए कहीं अधिक भारी पड़ रहे हैं।
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तेजस्वी यादव और अदालत वाला ट्विस्ट
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा आवास नियम उसी समय बना था जब तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री थे। बाद में हाई कोर्ट ने उस नियम को रद्द कर दिया, जिसके बाद नया आवंटन हुआ। यानी आज जिस नियम से लालू परिवार को बंगला छोड़ना पड़ रहा है, वह कभी खुद तेजस्वी के ही शासन में बना था।
सिर्फ बंगला विवाद है या 2025 चुनावी संकेत?
बिहार में ‘बंगला और सत्ता’ का रिश्ता हमेशा संवेदनशील रहा है। इसलिए 500 मीटर दूर बड़ा बंगला मिलने के बावजूद यह विवाद एक राजनीतिक प्रतीक बन चुका है। चर्चा के केंद्र में अब तीन बड़े सवाल हैं। क्या यह लालू परिवार की राजनीतिक ‘डिमोशन’ का संकेत है? क्या यह नीतीश कुमार की सियासी रणनीति का हिस्सा है? या फिर 2025 के लिए गठबंधन समीकरणों का शुरुआती खेल? बिहार का राजनीतिक मौसम इस ‘बंगला विवाद’ ने अचानक और भी दिलचस्प बना दिया है।
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