Waqf Amendment Bill 2025: राज्यसभा ने 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद 128–95 मतों से वक्फ संशोधन विधेयक पारित किया
राज्यसभा ने 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को 128–95 मतों से पारित किया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास है। जहाँ सरकार इसे सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला मान रहा है।
Waqf Amendment Bill 2025: राज्यसभा ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को 128–95 मतों के अंतर से पारित कर दिया। इस विधेयक को लेकर उच्च सदन में लगभग 12 घंटे तक गहन बहस चली, जिसमें पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने अपने-अपने दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से रखे।
यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की निगरानी, उपयोग और विवादों के निपटारे से जुड़े प्रावधानों में संशोधन करता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को सीमित करने वाला है।
सरकार का पक्ष
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ईरानी ने की। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर दशकों से चली आ रही अनियमितताओं और विवादों को सुलझाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे वक्फ बोर्डों को और अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा तथा यह कानून किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है।
स्मृति ईरानी ने बताया कि इस विधेयक के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार मिलेगा कि वे वक्फ संपत्तियों की जांच के लिए विशेष समितियों का गठन करें। साथ ही, वक्फ बोर्डों द्वारा संपत्ति के लेनदेन की जानकारी समय पर सार्वजनिक करने की बाध्यता भी जोड़ी गई है।
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विपक्ष की आपत्तियाँ
हालांकि विपक्षी दलों ने विधेयक को अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यह विधेयक “राजनीतिक पूर्वाग्रह” से प्रेरित है और इससे देश में सामाजिक सद्भाव को खतरा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि विधेयक को संसद की प्रवर समिति के पास भेजा जाए, ताकि व्यापक विमर्श हो सके।
टीएमसी, डीएमके और वामदलों के सांसदों ने भी विधेयक को असंवैधानिक और जनविरोधी करार दिया। उनका कहना था कि इससे वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा और सरकार को धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप का अवसर मिलेगा।
गंभीर बहस, गर्मागरम माहौल
पूरे दिन चली बहस के दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कुछ सांसदों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला बताया। वहीं, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने विपक्ष पर ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने’ का आरोप लगाया।
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विधेयक पर मतदान देर रात हुआ, जिसमें 128 सांसदों ने इसके पक्ष में और 95 ने विरोध में मत डाला। चूंकि एनडीए को राज्यसभा में संख्यात्मक बढ़त है, इसलिए विधेयक को पारित कराने में सरकार को ज्यादा कठिनाई नहीं हुई।
अब लोकसभा में पहले ही पारित
यह विधेयक पहले ही लोकसभा में 1 अप्रैल को पारित हो चुका है। राज्यसभा की मंजूरी के साथ अब इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
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समाज और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और मुस्लिम संगठनों ने विधेयक को लेकर चिंता व्यक्त की है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे “अल्पसंख्यकों की संस्थागत संपत्तियों पर नियंत्रण की कोशिश” बताया है। वहीं, कुछ कानून विशेषज्ञों ने सरकार के इरादों की सराहना करते हुए कहा कि यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग रोका जा सकता है।
वक्फ संशोधन विधेयक का पारित होना एक अहम राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम है, जो आने वाले समय में देश की धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन और शासन प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। अब सबकी निगाहें इसके कार्यान्वयन और सामाजिक प्रभावों पर टिकी हैं।
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