Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse: Sister tying Rakhi to her brother with a full moon symbolizing the lunar eclipse and Hindu festival celebrations. (PC -News18)
Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहनों के बीच प्यार के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है, हालांकि, 2026 में यह त्योहार एक खास खगोलीय घटना के कारण चर्चा में है। रक्षाबंधन 2026 के दौरान लगने वाले चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) को लेकर लोगों के मन में मुख्य सवाल यह है कि क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने में कोई बाधा आएगी? क्या भारत में सूतक काल (अशुभ समय) लागू होगा? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए तथ्यों को जानते हैं।
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28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा रक्षाबंधन
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र राखी बांधेंगी और उनकी लंबी उम्र, खुशी और समृद्धि के लिए प्रार्थना करेंगी। हालांकि, 2026 में चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) के संयोग ने इस बार त्योहार को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
सारक्षाबंधन पर पड़ रहा है ल का दूसरा चंद्र ग्रहण
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल का दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा। भारतीय मानक समय के अनुसार, यह ग्रहण सुबह लगभग 6:52 बजे शुरू होगा और दोपहर लगभग 12:32 बजे तक चलेगा, यानी इसकी कुल अवधि पांच घंटे से अधिक होगी। इसी वजह से, रक्षाबंधन 2026 के दौरान लगने वाला चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
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क्या भारत में लागू होगा सूतक काल?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण किसी खास जगह से सीधे दिखाई दे। चूंकि इस बार भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए, भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा और 2026 में रक्षाबंधन के दिन पड़ने वाले चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) का त्योहार की शुभ रस्मों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसका मतलब है कि बहनें बिना किसी डर या उलझन के राखी बांध सकती हैं। पूजा, तिलक समारोह और अन्य सभी धार्मिक परंपराएं हमेशा की तरह की जा सकती हैं।
भद्रा काल पर दें खास ध्यान
ज्योतिषियों का मानना है कि इस मामले में ग्रहण से ज्यादा जरूरी ‘भद्रा काल’ है। हिंदू धर्म में, भद्रा काल के दौरान शुभ काम न करने की सलाह दी जाती है। इसलिए, राखी बांधने से पहले यह पक्का कर लें कि भद्रा काल खत्म हो गया है। रक्षा बंधन 2026 के चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) के लिए, सही शुभ समय (मुहूर्त) चुनना खुद ग्रहण से ज्यादा जरूरी माना जाता है।
किन देशों में दिखेगा चंद्र ग्रहण? (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse)
हालांकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन दुनिया के कई दूसरे देशों में यह साफ़ तौर पर दिखाई देगा। अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत व अटलांटिक महासागरों के आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोग इस खगोलीय घटना को देख पाएंगे। चांद का रंग बदलता हुआ दिखेगा, इस घटना को आम तौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
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क्या इसका राशियों पर पड़ेगा असर? (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। माना जाता है कि इसका असर हर व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रहों की स्थिति के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। इसलिए, कोई भी नतीजा निकालने से पहले अपनी ज्योतिषीय जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है।
ग्रहण नहीं, सिर्फ शुभ मुहूर्त का रखें ध्यान
अगर आप रक्षा बंधन 2026 के चंद्र ग्रहण (Raksha Bandhan 2026 Lunar Eclipse) को लेकर परेशान हैं, तो अच्छी खबर यह है कि चूंकि ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए ‘सूतक काल’ (अशुभ समय) भी लागू नहीं होगा। आप पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ रक्षा बंधन मना सकते हैं। बस राखी बांधते समय भद्रा काल का ध्यान रखें और पक्का करें कि पवित्र धागा शुभ समय में ही बांधा जाए। एक बार फिर, भाई-बहन के इस पवित्र बंधन को बहुत खुशी और आस्था के साथ मनाया जाएगा।

