Reduced Toll on Expressways: अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब पूरा टोल नहीं, 15 फरवरी से कम दरों पर वसूली का नया नियम लागू
Reduced Toll on Expressways: अब यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे पूरी लंबाई में चालू नहीं है, तो यात्रियों को पूरे एक्सप्रेसवे का बढ़ा हुआ टोल नहीं देना होगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण और संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन करते हुए यह व्यवस्था लागू की है। मंत्रालय के अनुसार संशोधित नियम 15 फरवरी से प्रभावी होंगे। यह फैसला उन यात्रियों के लिए राहतभरा माना जा रहा है, जो अधूरे एक्सप्रेसवे पर भी प्रीमियम टोल चुका रहे थे।
पहले क्या था नियम?
वर्तमान व्यवस्था के तहत नेशनल एक्सप्रेसवे (Reduced Toll on Expressways) पर टोल शुल्क सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक लिया जाता है। इसका कारण यह बताया जाता है कि एक्सप्रेसवे तेज, सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव प्रदान करते हैं। हालांकि, कई मामलों में एक्सप्रेसवे पूरी लंबाई में चालू नहीं होते थे, लेकिन फिर भी उपयोगकर्ताओं से पूरा प्रीमियम शुल्क वसूला जाता था। इस पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे।
अब कैसे तय होगा टोल?
नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे शुरू से अंत तक पूरी तरह चालू नहीं है, तो उसके केवल तैयार और उपयोग में लाए जा रहे हिस्से पर ही टोल (Reduced Toll on Expressways) लिया जाएगा। वह भी सामान्य राष्ट्रीय राजमार्ग की दर से यानी 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब है कि यात्रियों को अधूरी सुविधाओं के लिए अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
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सीमित अवधि के लिए लागू रहेगा नियम
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन नियम लागू होने की तारीख से एक वर्ष तक या संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब तक एक्सप्रेसवे पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक यात्रियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न डाला जाए।
यात्रियों को राहत, सरकार को संतुलन
यह कदम सरकार की ओर से यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अधूरे प्रोजेक्ट पर प्रीमियम टोल वसूली को लेकर अक्सर असंतोष देखने को मिलता था। नई व्यवस्था से एक ओर जहां यात्रियों को सीधी राहत मिलेगी, वहीं सरकार और टोल ऑपरेटरों के बीच राजस्व संतुलन का भी ध्यान रखा गया है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में पारदर्शिता की ओर कदम
यह संशोधन केवल टोल दरों में बदलाव नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में भी एक संकेत है। अब प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति के अनुसार ही शुल्क तय होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस निर्णय का अन्य हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की प्रगति पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, 15 फरवरी से यात्रियों को अधूरे एक्सप्रेसवे (Reduced Toll on Expressways) पर कम टोल का लाभ मिलने जा रहा है।

