Sonam Wangchuk breaks 26-day hunger strike after government assurance on Paper Leak Law and education reforms.( pc- ANI)
Paper Leak Law और देशभर में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पिछले कई हफ्तों से चल रहे आंदोलन के बीच गुरुवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ लंबी बातचीत के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। सरकार की ओर से शिक्षा सुधार, पेपर लीक के मामलों पर सख्त कार्रवाई और संसद में व्यापक चर्चा का भरोसा मिलने के बाद वांगचुक ने अनशन खत्म करने की घोषणा की।
इस पूरे घटनाक्रम ने Paper Leak Law को लेकर देशभर में चल रही बहस को नई दिशा दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देर रात जारी अपने वीडियो संदेश में स्पष्ट संकेत दिया कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक कड़े कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार के आश्वासन के बाद खत्म हुआ 26 दिनों का अनशन
सोनम वांगचुक पिछले 26 दिनों से छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल पर थे। उनका कहना था कि देश में बार-बार सामने आने वाले परीक्षा पेपर लीक मामलों ने युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है और जवाबदेही तय किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसी मांग को लेकर वे जंतर-मंतर पर आंदोलन का समर्थन कर रहे थे, जहां से स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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गुरुवार देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे। दोनों मंत्रियों ने सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए, जिनमें शिक्षा सुधारों पर संसद में चर्चा, पेपर लीक के खिलाफ प्रभावी कदम और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के प्रति सकारात्मक रुख शामिल था। इन आश्वासनों के बाद वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
Sonam Wangchuk ने सोशल मीडिया पर क्या कहा?
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कई दौर की बातचीत और देश में किसी भी प्रकार की संभावित हिंसा को रोकने की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों के 65 से अधिक सांसदों ने भी उनसे मुलाकात कर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ जिन शर्तों पर सहमति बनी है, उनका विस्तृत विवरण वह जल्द ही एक अलग वीडियो संदेश के माध्यम से साझा करेंगे। साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील भी की।
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प्रधानमंत्री मोदी ने दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटनाक्रम के बाद देश को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा का विषय नहीं बल्कि करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के विश्वास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले कुछ महीनों से लगातार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी कैबिनेट बैठक में Paper Leak Law को और अधिक प्रभावी एवं कठोर बनाने पर विचार किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सोनम वांगचुक से डॉक्टरों की सलाह का पालन करने और जल्द स्वास्थ्य लाभ लेने की शुभकामनाएं भी दीं।
शिक्षा सुधार और संसद में चर्चा का भरोसा
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि सरकार पेपर लीक, परीक्षा सुधार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक मुद्दों पर संसद में गंभीर चर्चा कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सामने आए मामलों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक सुधारों पर सभी पक्षों की राय ली जाएगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया कि जिन परिवारों ने कथित पेपर लीक से जुड़े घटनाक्रमों के कारण अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए उचित सहायता और मुआवजे के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
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विपक्ष ने भी की थी अनशन खत्म करने की अपील
बुधवार को विपक्षी दलों के कई सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी सोनम वांगचुक से मिलने अस्पताल पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे आग्रह किया था कि उनकी आवाज अब पूरे देश तक पहुंच चुकी है और संसद में भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना था कि देश को वांगचुक के अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, इसलिए उन्हें अपना स्वास्थ्य प्राथमिकता देनी चाहिए। बताया जा रहा है कि इन अपीलों और सरकार के आश्वासन के बाद ही अनशन समाप्त करने का अंतिम निर्णय लिया गया।
छात्रों की मांगों पर अब रहेगी नजर
हालांकि अनशन समाप्त होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है। आंदोलन से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि वे सरकार की ओर से किए गए वादों के अमल पर नजर रखेंगे। यदि Paper Leak Law को मजबूत बनाने, परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संबंध में ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कठोर कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुधार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, डिजिटल सुरक्षा और समयबद्ध जांच व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि सरकार इन सभी पहलुओं पर प्रभावी तरीके से काम करती है, तो भविष्य में छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सकता है।
फिलहाल 26 दिनों तक चले इस अनशन का समापन आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब देशभर की निगाहें सरकार के अगले कदम और प्रस्तावित Paper Leak Law पर टिकी हैं, जिससे लाखों छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

