STAMPEDE AT TIRUPATI: आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित विष्णु निवासम में वैकुंठ द्वार सर्वदर्शन टोकन वितरण के दौरान मची भगदड़ ने छह श्रद्धालुओं की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने धार्मिक स्थल पर व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर कर दिया है।
क्या हुआ?
वैकुंठ द्वार सर्वदर्शन के लिए श्रद्धालुओं को टोकन जारी करने की प्रक्रिया बुधवार शाम से ही शुरू हुई थी। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने 10, 11 और 12 जनवरी को दर्शन के लिए विशेष टोकन जारी करने की घोषणा की थी। गुरुवार सुबह 5 बजे से टोकन वितरण शुरू होना था, लेकिन इससे पहले ही भारी संख्या में श्रद्धालु विष्णु निवासम और अन्य टोकन वितरण केंद्रों पर इकट्ठा हो गए।
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स्थिति तब नियंत्रण से बाहर हो गई जब भीड़ का दबाव बढ़ने लगा। विष्णु निवासम, श्रीनिवासम और सत्यनारायणपुरम जैसे केंद्रों पर अचानक भगदड़ मच गई। भगदड़ के दौरान तमिलनाडु के सेलम की एक महिला श्रद्धालु समेत छह लोगों की मौत हो गई। चार अन्य घायल हो गए, जिन्हें तुरंत रुइया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएमओ की ओर से जारी बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने घटना के तुरंत बाद अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया और घायलों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने उच्च अधिकारियों को तुरंत घटना स्थल पर पहुंचने और राहत कार्य तेज करने का आदेश दिया।
घटना का कारण
जानकारी के अनुसार, टोकन वितरण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हो गए थे, लेकिन टोकन वितरण केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई, जिससे भगदड़ मच गई।
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वैकुंठ द्वार सर्वदर्शन का महत्व
वैकुंठ द्वार सर्वदर्शन को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र माना जाता है। इस दौरान भक्त भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु तिरुपति पहुंचते हैं, खासकर इस पवित्र अवसर पर। हालांकि, इस बार भारी भीड़ और व्यवस्थाओं की कमी के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने घटना की जांच शुरू कर दी है। टीटीडी अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार सुबह 5 बजे से टोकन वितरण की प्रक्रिया शुरू होने वाली थी, लेकिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण हालात बिगड़ गए।

