US Tariff Cut: मोदी के आगे झुक गए ट्रंप, टैरिफ का खेल हुआ खत्म!
Trump tariff rollback on India: अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार के मंच पर एक बार फिर वही पुराना दृश्य देखने को मिला, जिसमें तेज बयानबाजी के बाद आखिरकार सौदे की मेज पर आकर सुर बदल जाते हैं। डोनाल्ड ट्रंप जिस टैरिफ को कभी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की ढाल बताकर दुनिया के सामने लहराते थे, वही टैरिफ अब भारत के मामले में नरम पड़ता दिख रहा है।
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के फैसले ने न सिर्फ वैश्विक बाजारों का ध्यान खींचा है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या ट्रंप की टैरिफ रणनीति वास्तव में ताकत का प्रदर्शन थी या फिर बातचीत की शुरुआत भर।
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वैश्विक निर्यात में भारत को बड़ी बढ़त
ताज़ा फैसले के बाद भारत वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में कहीं अधिक मज़बूत स्थिति में नजर आ रहा है। मौजूदा टैरिफ़ ढांचे में भारत पर अमेरिकी शुल्क 18 प्रतिशत रहेगा, जबकि इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत और चीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लागू है।
एशिया की इन प्रमुख निर्यातक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत अब कम शुल्क वाले देशों की कतार में आ गया है। यह बदलाव सिर्फ प्रतिशत का खेल नहीं है, बल्कि इससे भारत के वस्त्र, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों को अमेरिकी बाज़ार में नई सांस मिलती दिख रही है।
रूसी तेल बना फैसले की सबसे बड़ी वजह
व्हाइट हाउस ने सोमवार को इस फैसले के पीछे की वजह भी साफ कर दी। बयान के मुताबिक, रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने को लेकर भारत की सहमति के बाद, रूसी तेल से जुड़े 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को पूरी तरह हटा लिया गया है।
यह फैसला व्हाइट हाउस की ओर से उस फोन बातचीत के बाद सामने आया, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई थी। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद समाप्त करने की प्रतिबद्धता के चलते यह अतिरिक्त टैरिफ अब हटाया जा रहा है।
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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया ऐलान
ट्रंप ने इस फैसले को अपने अंदाज़ में पेश किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर उन्होंने लिखा कि इस समझौते के तहत अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने इसे ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़ा ‘बड़ा बदलाव’ बताया। दिलचस्प यह है कि जिस टैरिफ़ को ट्रंप पहले भारत पर दबाव बनाने का हथियार बता रहे थे, वही अब उनके शब्दों में द्विपक्षीय रिश्तों को मज़बूत करने का माध्यम बन गया।
ऊर्जा और युद्ध भी बातचीत का हिस्सा
ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच व्यापार के साथ-साथ रूस- यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से, तथा संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह बयान दिखाता है कि अब ऊर्जा राजनीति सीधे व्यापार नीति से जुड़ चुकी है।
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मोदी का संतुलित और कूटनीतिक जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले को सकारात्मक रूप में पेश किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने कहा कि ‘ मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा, यह जानकर खुशी हुई। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र साथ काम करते हैं, तो इससे आम लोगों को लाभ होता है और सहयोग के नए अवसर खुलते हैं।
टैरिफ की पूरी टाइमलाइन, उतार-चढ़ाव से भरी कहानी
अगर बीते एक साल की टैरिफ टाइमलाइन देखें, तो तस्वीर साफ होती है-
2 अप्रैल 2025-भारत पर 10% बेसलाइन टैरिफ
5 अप्रैल 2025- 26% टैरिफ का ऐलान
9 अप्रैल 2025- 90 दिन के लिए टैरिफ हटाया
10 जुलाई 2025- भारत का WTO में जवाबी प्रस्ताव
31 जुलाई 2025- 25% रेसिप्रोकल टैरिफ
6 अगस्त 2025- रूसी तेल पर 25% अतिरिक्त टैरिफ
27 अगस्त 2025- कुल टैरिफ 50%
2 फरवरी 2026- टैरिफ घटकर 18%
भारत के लिए सौदा फायदे का
इस पूरी कहानी से साफ़ है कि ट्रंप के लिए टैरिफ़ अक्सर सौदेबाज़ी का हथियार रहे हैं। भारत के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से बेहद अहम है। कम टैरिफ का मतलब है बेहतर कीमत, ज्यादा निर्यात और मज़बूत वैश्विक स्थिति।
अंत में यही कहा जा सकता है कि टैरिफ़ का खेल भले खत्म हो गया हो, लेकिन वैश्विक राजनीति में सौदेबाज़ी का खेल कभी खत्म नहीं होता। और इस बार, सौदे की मेज़ से भारत को बेहतर परिणाम मिला है।

