Symbolic image representing the death of two Indian citizens in the Russia-Ukraine war, showing a somber atmosphere and the impact of the conflict on families.

Russia-Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध भारतीय नागरिकों के लिए लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। भारत सरकार की बार-बार जारी की गई एडवाइजरी और मॉस्को की ओर से सहयोग के दावों के बावजूद, युद्ध क्षेत्र में भारतीयों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में युद्ध में मारे गए दो और भारतीय नागरिकों के शव दिल्ली लाए गए हैं, जिससे इस गंभीर मुद्दे पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।
वीजा पर गए स्टूडेंट, सेना में झोंक दिए गए
मृतकों की पहचान राजस्थान के बीकानेर निवासी अजय गोदारा (22) और उत्तराखंड के राकेश कुमार (30) के रूप में हुई है। दोनों युवा स्टूडेंट वीजा पर रूस गए थे। आरोप है कि एजेंटों ने उन्हें क्लीनर और हेल्पर की नौकरी का लालच देकर रूस बुलाया और बाद में जबरन रूसी सेना में भर्ती करवा दिया। इसके बाद उन्हें यूक्रेन के खिलाफ युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया।
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परिवारों की टूटी उम्मीदें और दर्दनाक इंतजार
अजय गोदारा के चचेरे भाई प्रकाश गोदारा के अनुसार, 9 दिसंबर को मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से फोन आया, जिसमें अजय की मौत की जानकारी दी गई। अजय ने आखिरी बार 21 सितंबर को परिवार से बात की थी और उससे पहले उसने एक वीडियो भेजकर मदद की गुहार लगाई थी। वीडियो में उसने बताया था कि उन्हें जबरन युद्ध में भेजा जा रहा है।
वहीं राकेश कुमार के दोस्त पंकज कुमार ने बताया कि राकेश की मौत डोनबास इलाके में हुई। उसने आखिरी बार 30 अगस्त को अपने परिवार से बात की थी। पांच दिन पहले ही परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली और अब उसका शव भारत लाया गया।
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एक्टिव मिलिट्री सर्विस के दौरान मौत
रूस द्वारा जारी डेथ सर्टिफिकेट में अजय गोदारा की मौत का कारण ‘एक्टिव मिलिट्री सर्विस के दौरान’ बताया गया है। यह साफ करता है कि भारतीय नागरिकों को सीधे युद्ध में झोंका जा रहा है। अजय का अंतिम संस्कार बीकानेर में कर दिया गया, जहां परिवार गहरे सदमे में है।
जंतर-मंतर से मंत्रालय तक उठी आवाज
गोदारा परिवार उन कई भारतीय परिवारों में शामिल है जिन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और विदेश मंत्रालय से भी कई बार गुहार लगाई थी, लेकिन नतीजा बेहद दुखद रहा।
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61 भारतीयों की वापसी का मुद्दा संसद तक पहुंचा
3 दिसंबर को, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने रूसी सेना में कथित तौर पर भर्ती किए गए 61 भारतीयों की सुरक्षित वापसी का मामला उठाया था। यह मुद्दा अब कूटनीतिक स्तर पर भारत-रूस संबंधों की एक बड़ी चुनौती बन गया है।
मॉस्को के दावे और जमीनी हकीकत
हालांकि रूसी दूतावास ने अगस्त 2024 में दावा किया था कि वह अब भारतीयों की भर्ती नहीं कर रहा है और पहले से भर्ती लोगों की रिहाई में सहयोग कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद मौतें और लापता होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक कम से कम 16 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है और 59 लोग लापता हैं।
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अभी भी 44 भारतीय रूसी सेना में तैनात
8 नवंबर को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि फिलहाल 44 भारतीय नागरिक रूसी सेना में सेवा दे रहे हैं। मंत्रालय ने युवाओं से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के झांसे में न आएं और केवल वैध व सुरक्षित माध्यमों से ही विदेश यात्रा करें।

