Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सामाजिक संस्थाओं और ट्रस्टों के कामकाज को और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक कर 165 साल पुराने सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 को बदलने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यह कानून अब पुराने समय का हो चुका है और मौजूदा हालात में इसकी कई खामियां सामने आती हैं।
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सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नया कानून ऐसा होना चाहिए, जिसमें संस्थाओं के पंजीकरण, नवीनीकरण और उनकी संपत्तियों के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि पुराने कानून में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन की कमी के कारण कई बार संस्थाओं में गड़बड़ी और विवाद देखने को मिलते हैं।
मुख्यमंत्री ने खासतौर पर संस्थाओं की संपत्तियों के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी मनमानी से संस्थाओं की संपत्ति बेच देते हैं, जिससे संस्थाओं का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसलिए नए कानून में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का संस्थाओं के आंतरिक मामलों में दखल न्यूनतम होना चाहिए। अगर कोई विवाद सामने आता है तो उसे संस्था की प्रबंधन समिति ही सुलझाए।
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योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रदेश में इस समय आठ लाख से ज्यादा संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ऐसे में उनका कामकाज पारदर्शी और व्यवस्थित होना बेहद जरूरी है। उन्होंने नए कानून में पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और केवाईसी आधारित बनाने का सुझाव दिया है।
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सरकार का मानना है कि नए कानून से संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी, साथ ही वे समाज की सेवा और अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएंगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से जल्द ही इस नए और आधुनिक कानून का मसौदा तैयार करने को कहा है।
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