MP News: राहुल गांधी का पचमढ़ी दौरा, कांग्रेस जिला अध्यक्षों को देंगे जीत का मंत्र
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ’वोटर अधिकार यात्रा’ ने राज्य की सियासत में नई हलचल मचा दी है। 16 दिन तक चली यह यात्रा 25 जिलों और 110 विधानसभा क्षेत्रों से गुज़रते हुए पटना में समाप्त हुई। लगभग 1300 किलोमीटर की इस पदयात्रा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को एक साझा मंच पर लाकर खड़ा कर दिया।
राहुल गांधी ने इस अभियान को केवल चुनावी यात्रा नहीं, बल्कि “नैतिक लड़ाई” करार दिया। उनका आरोप था कि लाखों मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए गए हैं। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और ‘वोट चोरी’ का मुद्दा गरमाया।
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सासाराम से पटना तक विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
यह यात्रा सासाराम से शुरू होकर पटना तक पहुंची। चुनाव आयोग की मसौदा सूची में लगभग 65.5 लाख वोटरों के नाम गायब होने का मामला विपक्ष का मुख्य मुद्दा रहा। राहुल गांधी ने कहा कि, “यह सिर्फ बिहार का मामला नहीं है, बल्कि भारत के लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है।”
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विपक्षी दलों की एकजुटता
यात्रा में कांग्रेस के साथ-साथ INDIA गठबंधन के बड़े नेताओं ने भी हिस्सा लिया। प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव, एमके स्टालिन, कनिमोझी, हेमंत सोरेन, सुप्रिया सुले, संजय राउत और वामपंथी दलों के कई दिग्गज नेता मंच साझा करते दिखे। इसने विपक्षी एकता का स्पष्ट संदेश दिया।
‘एक व्यक्ति, एक वोट’ का संदेश
राहुल गांधी ने अपनी यात्रा का मुख्य संदेश “एक व्यक्ति, एक वोट” बताया। उन्होंने दावा किया कि दलित, ओबीसी, मुस्लिम और गरीब वर्ग के लोगों को सुनियोजित तरीके से सूची से हटाया गया है। राहुल गांधी बोले, “यह यात्रा संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए है।”
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कांग्रेस के लिए उम्मीद की किरण
करीब चार दशकों से बिहार में कमजोर होती कांग्रेस के लिए यह यात्रा जीवनदान की तरह साबित हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ा है और राहुल गांधी को विपक्ष का केंद्रीय चेहरा स्थापित करने की कोशिश साफ नज़र आई।
जनता से सीधा संवाद
यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने गांवों और कस्बों में आम लोगों से सीधी बातचीत की। वे सफेद टी-शर्ट और गमछा पहनकर खुली जीप में सफर करते नजर आए। उन्होंने मखाने की खेती देखी और कहा कि “99 प्रतिशत बहुजन मेहनत करते हैं और फायदा सिर्फ 1 प्रतिशत बिचौलियों को मिलता है।”
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विवादों से भी घिरी यात्रा
यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं रही। दरभंगा में पीएम मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी पर बीजेपी ने विपक्ष को घेरा। पटना में पक्ष-विपक्ष कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। राहुल गांधी के काफिले में एक पुलिसकर्मी घायल होने की घटना ने भी विवाद खड़ा किया।
चुनावी न्याय के लिए क्रांति?
पटना में यात्रा के अंतिम दिन राहुल गांधी ने गांधी मैदान से आंबेडकर की प्रतिमा तक मार्च किया। उन्होंने इसे “चुनावी न्याय के लिए क्रांति” करार दिया। विपक्ष ने पूरे अभियान को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जंग बताया।
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कांग्रेस का खोया जनाधार लौटाने की कोशिश
कांग्रेस ने इस लड़ाई को जातीय राजनीति से ऊपर उठाकर अधिकार और लोकतंत्र की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया है। पार्टी अब इसे बिहार चुनाव 2025 में भुनाने की तैयारी कर रही है।
बिहार चुनावी पारा चढ़ा
बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में संभावित हैं। इस यात्रा के बाद राजनीतिक तापमान और भी बढ़ गया है। आरोप-प्रत्यारोप तेज हो चुके हैं और यह साफ है कि यह चुनाव सिर्फ बिहार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य का भी संकेतक होगा।

