Uttarakhand Water Audit: इंदौर हादसे के बाद उत्तराखंड शासन सतर्क, अब राज्यभर की पेयजल लाइनों का होगा व्यापक ऑडिट
Water Quality Monitoring: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई कई मौतों की दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड शासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। राज्य सरकार ने भविष्य में किसी भी तरह की जनहानि को रोकने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत अब उत्तराखंड में सभी पेयजल लाइनों का ऑडिट किया जाएगा। पेयजल सचिव शैलेश बगोली ने उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम को इस संबंध में स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
दूषित पानी से मौतों ने बढ़ाई चिंता
इंदौर में दूषित पानी पीने से 10 से अधिक लोगों की मौत के बाद देशभर में जलापूर्ति व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि यदि समय रहते पेयजल नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहां कई शहरों और कस्बों में दशकों पुरानी पेयजल लाइनें बिछी हुई हैं, वहां इस तरह की आशंका और भी अधिक बढ़ जाती है।
READ MORE: अंकिता भंडारी मर्डर केस, न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर जनसैलाब, श्रीनगर से देहरादून तक उबाल
राज्य की सभी पेयजल लाइनों का ऑडिट अनिवार्य
पेयजल सचिव शैलेश बगोली ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि राज्य में जल संस्थान और पेयजल निगम द्वारा संचालित सभी पेयजल लाइनों का चरणबद्ध तरीके से ऑडिट किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी पेयजल आपूर्ति में दूषित पानी के मिलने की आशंका न रहे। ऑडिट के दौरान खासतौर पर उन क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा, जहां पेयजल लाइनें नालियों या सीवर लाइनों के पास से गुजर रही हैं।
पुरानी और जर्जर लाइनों पर विशेष नजर
उत्तराखंड के कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पेयजल लाइनें काफी पुरानी हो चुकी हैं। समय के साथ इनमें जर्जरता, लीकेज और टूट-फूट की समस्या सामने आती रही है। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है, जब नालियों और सीवर का पानी रिसकर पेयजल लाइनों में मिल सकता है। इसी को देखते हुए शासन ने निर्देश दिए हैं कि पुरानी और कमजोर लाइनों की तत्काल पहचान की जाए और जहां जरूरत हो, वहां मरम्मत या प्रतिस्थापन कराया जाए।
READ MORE: नववर्ष 2026 का पहला महा स्नान, पौष पूर्णिमा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब
लीकेज मिलने पर तुरंत सुधार के आदेश
पेयजल सचिव ने स्पष्ट किया है कि ऑडिट के दौरान यदि किसी भी स्थान पर पेयजल लाइन में लीकेज पाई जाती है, तो उसे तुरंत दुरुस्त किया जाए। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि मरम्मत कार्य के दौरान वैकल्पिक स्वच्छ जलापूर्ति की व्यवस्था बनी रहे, ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
READ MORE: तराई-भाबर में लौट आई शीतलहर, घने कोहरे से जनजीवन प्रभावित
पानी की टंकियों की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन
शासन ने पानी की टंकियों की सफाई को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। निर्देश दिए गए हैं कि सभी जल टंकियों की निर्धारित शिड्यूल के अनुसार नियमित सफाई कराई जाए। इसके साथ ही टंकियों और पूरी सप्लाई लाइन में क्लोरीनेशन सुनिश्चित किया जाए। पेयजल सचिव ने विशेष रूप से यह कहा है कि क्लोरीनेशन केवल स्रोत पर ही नहीं, बल्कि हेड से लेकर टेल यानी अंतिम उपभोक्ता तक प्रभावी ढंग से हो।
READ MORE: अंकिता हत्याकांड के वायरल वीडियो पर सियासी हलचल, मंत्री सुबोध उनियाल ने साजिश की आशंका जताई
पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होगी
पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भी अब नियमित और सघन जांच अनिवार्य कर दी गई है। जल संस्थान और पेयजल निगम को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर पानी के सैंपल लेकर उसकी लैब जांच कराएं। किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। शासन का मानना है कि नियमित जांच से दूषित जलापूर्ति की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर
पेयजल से जुड़ी आमजन की शिकायतों को लेकर भी शासन ने गंभीरता दिखाई है। सचिव ने निर्देश दिए हैं कि जलापूर्ति से संबंधित किसी भी शिकायत का तत्काल समाधान किया जाए। चाहे वह पानी की गंध, रंग, स्वाद या गंदगी से जुड़ी शिकायत हो, उसे नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेने और समस्या का समाधान करने के आदेश दिए गए हैं।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
भविष्य में हादसों को रोकने की पहल
राज्य सरकार का मानना है कि इंदौर जैसी घटनाओं से सबक लेकर यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है। पेयजल लाइनों का ऑडिट, नियमित सफाई, क्लोरीनेशन और गुणवत्ता जांच जैसे कदम राज्य की जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएंगे। इससे न केवल आम लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि शासन और प्रशासन के प्रति जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।
उत्तराखंड की तमाम बड़ी खबर LIVE देखने के लिये क्लिक करे
स्वच्छ और सुरक्षित जलापूर्ति सरकार की प्राथमिकता
उत्तराखंड शासन ने यह साफ कर दिया है कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इंदौर की दुखद घटना के बाद लिया गया यह फैसला राज्य के लिए एक अहम और दूरगामी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे उत्तराखंड में दूषित पानी से जुड़ी किसी भी अनहोनी की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

