Rural Tourism: Villages of Pithoragarh and Tea Gardens of Champawat will become international tourist hotspots

Rural Tourism: उत्तराखंड के सीमांत पर्वतीय जिलों में पर्यटन को नई पहचान देने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनोखी पहल शुरू की है। पिथौरागढ़ के गुंजी और चंपावत के चाय बागानों को Rural Tourism और Tea Garden Experience थीम पर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न सिर्फ पहाड़ी संस्कृति और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार का भी नया आधार देगी।
स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की बड़ी पहल
भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत देशभर में नए पर्यटन स्थलों को थीम आधारित रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तराखंड को इस योजना में विशेष महत्व मिला है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर को देखते हुए पिथौरागढ़ और चंपावत को चुना गया। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए पूरा वित्तीय सहयोग देने का वादा किया है, जिससे राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है।
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पिथौरागढ़ में रूरल टूरिज्म क्लस्टर
नेपाल और तिब्बत सीमा से सटे पिथौरागढ़ के गुंजी गांव को ग्रामीण पर्यटन क्लस्टर के रूप में विकसित करने का खाका तैयार हो चुका है। लगभग 17.86 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र पहले ही 10 फीसदी राशि जारी कर चुका है। यहां पारंपरिक शैली के होमस्टे, लकड़ी और बांस से बने कॉटेज, पैदल रास्तों का विकास, और सांस्कृतिक आयोजन जैसे लोकगीत-लोकनृत्य की प्रस्तुतियां शामिल की जाएंगी। साथ ही स्थानीय कुमाऊंनी व्यंजनों का स्वाद पर्यटकों को मिलेगा और हस्तशिल्प जैसे ऊन, हस्तनिर्मित कपड़े व लकड़ी के शिल्प को भी बाजार मिलेगा।
एडवेंचर और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
गुंजी को केवल सांस्कृतिक केंद्र ही नहीं, बल्कि एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने पर भी जोर है। परियोजना के तहत ट्रैकिंग रूट, नेचर वॉक, और अन्य साहसिक गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। सड़क, पेयजल और शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
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चंपावत का टी गार्डन एक्सपीरियंस
चंपावत जिले के चाय बागानों को नया जीवन देने के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल हरियाली का आनंद लेंगे, बल्कि चाय की खेती, पत्तियां तोड़ने की पारंपरिक तकनीक और चाय बनाने की अनूठी विधि को करीब से देख सकेंगे। नेचर वॉक, हेरिटेज ट्रेल्स और चाय से जुड़ी वर्कशॉप पर्यटकों को एक अलग अनुभव देंगी।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बढ़ावा
चाय बागानों के पास पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए होमस्टे और गेस्ट हाउस तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय शहद, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजन पर्यटन पैकेज का हिस्सा बनेंगे। यहां आयोजित सांस्कृतिक मेले और पारंपरिक कार्यक्रम पर्यटकों को क्षेत्र की विरासत से जोड़ने का काम करेंगे।
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रोजगार और पहचान का नया अवसर
इन दोनों परियोजनाओं से पर्वतीय जिलों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। ग्रामीण महिलाएं होमस्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन के माध्यम से आय अर्जित कर सकेंगी। साथ ही युवा गाइड, एडवेंचर ट्रेनर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी भूमिका निभा सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि इन इलाकों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी विशेष स्थान मिलेगा।
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उत्तराखंड पर्यटन का बदलता चेहरा
केंद्र सरकार की इस पहल से पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे अपेक्षाकृत कम चर्चित क्षेत्र अब नई पहचान पा सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर विकसित इन डेस्टिनेशन पर घरेलू और विदेशी दोनों तरह के पर्यटक आकर्षित होंगे। राज्य पर्यटन विभाग का मानना है कि अगले एक वर्ष में दोनों परियोजनाएं मूर्त रूप ले लेंगी और उत्तराखंड के लिए नए पर्यटन दरवाजे खोलेंगी।
पिथौरागढ़ का रूरल टूरिज्म क्लस्टर और चंपावत का टी गार्डन एक्सपीरियंस उत्तराखंड के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण पर्यटन को नई उड़ान देगी, बल्कि स्थानीय परंपरा और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चमकाएगी।

