Big agitation of teachers in Uttarakhand, preparations to surround the secretariat from the road regarding demands
Teacher’s Protest: उत्तराखंड में शिक्षकों का आंदोलन अब और तेज़ होने जा रहा है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए राजकीय शिक्षक संघ ने एक नई रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के तहत गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक विशाल जुलूस निकाले जाएंगे और मुख्यमंत्री कार्यालय तक घेराव किया जाएगा। शिक्षक संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
शिक्षकों की मुख्य मांगें
राजकीय शिक्षक संघ पिछले कई महीनों से अपनी मांगों को लेकर लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इनमें प्रमुख मांगें हैं:
- शत प्रतिशत पदोन्नति (100% Promotion) की व्यवस्था लागू करना।
- प्रधानाचार्य के पदों पर सीधी भर्ती का विरोध।
- लंबे समय से अटके स्थानांतरण प्रक्रिया को शुरू करना।
शिक्षक संघ का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और वार्ता के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसी निराशा के बाद अब संगठन ने जनसमर्थन हासिल करने और दबाव बनाने की दिशा में व्यापक आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया है।
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गढ़वाल और कुमाऊं में जुलूस
आगामी दिनों में शिक्षक संघ गढ़वाल के श्रीनगर और कुमाऊं के हल्द्वानी में विशाल जुलूस निकालने जा रहा है। यह जुलूस छुट्टी के दिन आयोजित किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक शिक्षक और आम लोग इसमें शामिल हो सकें। संगठन का उद्देश्य है कि शिक्षकों की मांगों को लेकर आम जनता का समर्थन भी मिले।
शिक्षक संघ ने यह भी घोषणा की है कि वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे और अपने-अपने क्षेत्रों में संबंधित विधायकों का घेराव करेंगे। संघ का मानना है कि जब तक जनप्रतिनिधियों पर दबाव नहीं बनेगा, तब तक सरकार गंभीरता से कदम नहीं उठाएगी।
सचिवालय और सीएम कार्यालय का घेराव
संघ ने अपनी रणनीति में अगले चरण की भी रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। यदि मांगे जल्द नहीं मानी जातीं, तो शिक्षक संघ सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय का घेराव करेगा। इसके साथ ही, ब्लॉक और जिला स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
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संघ का कहना है कि यह आंदोलन केवल शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए है और इसमें किसी भी तरह की राजनीतिक मंशा शामिल नहीं है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ेंगे शिक्षक
आंदोलन के दबाव को और बढ़ाने के लिए शिक्षक संघ ने विभागीय स्तर पर भी बड़ा फैसला लिया है। अब सभी प्रभारी प्रधानाचार्य और डायट प्राचार्य केवल शिक्षण कार्यों पर ध्यान देंगे और प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ देंगे। यदि इन जिम्मेदारियों को जबरन अधीनस्थ कर्मचारियों को सौंपा गया, तो शिक्षक संघ इसका विरोध करेगा।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि किसी शिक्षक पर दबाव बनाया गया, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों के खिलाफ मानसिक उत्पीड़न और मानहानि का मुकदमा अदालत में दर्ज कराया जाएगा।
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पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
हालांकि शिक्षक संघ ने साफ किया है कि उनकी लड़ाई सरकार से है, छात्रों से नहीं। इसलिए पढ़ाई से जुड़े कार्यों में कोई रुकावट नहीं डाली जाएगी। शिक्षक केवल शिक्षण कार्य करेंगे और अन्य गैर-शैक्षिक कार्यों का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे।
संघ ने कहा है कि प्रदेश में आपदा जैसी स्थिति को देखते हुए वे कार्यबहिष्कार जैसा कदम नहीं उठा रहे, बल्कि केवल अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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शिक्षक संघ का ऐलान
राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चौहान ने कहा, “हमारा आंदोलन पूरी तरह न्यायोचित है। हम किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलता रहेगा।”
उत्तराखंड में शिक्षकों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। गढ़वाल से कुमाऊं तक जुलूस, विधायकों और सचिवालय का घेराव और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से हटने जैसे फैसले सरकार के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार शिक्षकों की इन मांगों को लेकर किस तरह का रुख अपनाती है।

