Adventure Tourism News: उत्तराखंड ट्रैकिंग नियमावली 2026 का खाका तैयार, ट्रैकर्स की सुरक्षा से लेकर स्थानीय युवाओं को रोजगार तक, सरकार ने तय किए सख्त प्रावधान
Uttarakhand Trekking Policy 2026: उत्तराखंड, जिसे देश-दुनिया में ट्रैकिंग और पर्वतारोहण का प्रमुख केंद्र माना जाता है, अब साहसिक पर्यटन को लेकर एक नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। राज्य सरकार पहली बार ट्रैकिंग से जुड़ी गतिविधियों के लिए एक स्पष्ट, व्यवस्थित और सख्त नीति लागू करने की तैयारी कर चुकी है। ‘उत्तराखंड ट्रैकिंग नियमावली 2026’ नाम से तैयार इस ड्राफ्ट का उद्देश्य ट्रैकिंग को सुरक्षित, नियंत्रित और जिम्मेदार बनाना है। यह नियमावली लागू होने के बाद जहां एक ओर ट्रैकर्स के लिए पहाड़ों में सफर अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित होगा, वहीं दूसरी ओर ट्रैकिंग कराने वाली एजेंसियों और टूर ऑपरेटर्स पर कड़ी जिम्मेदारी भी तय होगी।
बढ़ते हादसों ने सरकार को किया सतर्क
बीते कुछ वर्षों में उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट्स पर कई गंभीर हादसे सामने आए हैं। मौसम की अनदेखी, बिना प्रशिक्षित गाइड, बिना मेडिकल जांच और अव्यवस्थित संचालन के कारण कई बार जान-माल का नुकसान हुआ। इन घटनाओं ने सरकार और प्रशासन को यह महसूस कराया कि यदि ट्रैकिंग गतिविधियों को नियमों के दायरे में नहीं लाया गया तो जोखिम लगातार बढ़ता जाएगा। इसी पृष्ठभूमि में पर्यटन विभाग और वन विभाग ने मिलकर एक विस्तृत ट्रैकिंग नियमावली तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया, जिसका परिणाम अब 2026 की नई नीति के रूप में सामने आ रहा है।
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पहली बार ट्रैकिंग के लिए बने स्पष्ट नियम
अब तक उत्तराखंड में ट्रैकिंग के लिए कोई ठोस राज्य स्तरीय नियमावली नहीं थी। किसी भी एजेंसी या निजी ऑपरेटर द्वारा बिना औपचारिक अनुमति ट्रैकिंग कराई जाती थी। नई नियमावली लागू होने के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। सरकार का मानना है कि ट्रैकिंग केवल रोमांच नहीं बल्कि एक जिम्मेदार गतिविधि है, जिसमें सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सहभागिता बेहद जरूरी है।
स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद तैयार हुआ ड्राफ्ट
ट्रैकिंग नियमावली का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले पर्यटन विभाग ने ट्रैकिंग एसोसिएशन, टूर ऑपरेटर्स, गाइड्स, पर्वतारोहण संस्थानों और संबंधित एजेंसियों से व्यापक चर्चा की। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नियम व्यवहारिक हों और जमीनी स्तर पर लागू किए जा सकें। शासन स्तर पर अंतिम विचार के बाद इस ड्राफ्ट को जल्द अधिसूचित किए जाने की तैयारी है।
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पंजीकरण होगा अनिवार्य
नियमावली के तहत अब राज्य में ट्रैकिंग कराने वाली हर एजेंसी, कंपनी, फर्म या टूर ऑपरेटर को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। यह पंजीकरण 5 वर्षों के लिए वैध रहेगा।जो एजेंसियां पहले से ट्रैकिंग गतिविधियां चला रही हैं, उन्हें नियम लागू होने के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण ट्रैकिंग कराने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गाइड्स की योग्यता और आयु सीमा तय
नई नीति में ट्रैकिंग गाइड्स की योग्यता को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
लो एल्टीट्यूड गाइड
- आयु सीमा: 18 से 60 वर्ष
- 50 वर्ष से अधिक आयु पर हर वर्ष मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य
- मान्यता प्राप्त संस्थान से बेसिक पर्वतारोहण कोर्स जरूरी
- पंजीकृत एजेंसी से कम से कम 2 वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र अनिवार्य
हाई एल्टीट्यूड गाइड
- आयु सीमा: 20 से 60 वर्ष
- बेसिक और एडवांस पर्वतारोहण कोर्स अनिवार्य
- हर साल मेडिकल जांच आवश्यक
- न्यूनतम 2 वर्ष का अनुभव प्रमाण पत्र जरूरी
इससे ट्रैकर्स को प्रशिक्षित और अनुभवी गाइड मिल सकेंगे।
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स्थानीय युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा
नियमावली का एक महत्वपूर्ण प्रावधान स्थानीय रोजगार से जुड़ा है। इसके तहत हर टूर ऑपरेटर या एजेंसी के कर्मचारियों में कम से कम 60 प्रतिशत स्थानीय निवासी होना अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पहाड़ी क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार मिलेगा, पलायन पर रोक लगेगी और स्थानीय समुदाय साहसिक पर्यटन का सीधा हिस्सा बनेगा।
ट्रैकर्स के लिए बीमा और मेडिकल जरूरी
हाई और लो एल्टीट्यूड ट्रैकिंग पर जाने वाले प्रत्येक ट्रैकर का बीमा और मेडिकल सर्टिफिकेट एजेंसी के पास होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही मौसम की जानकारी पहले से लेना एजेंसी की जिम्मेदारी तय की गई है। यदि मौसम खराब होता है तो ट्रैकिंग गतिविधियों को रोकना और ट्रैकर्स को नजदीकी सुरक्षित कैंप में ठहराना अनिवार्य होगा।
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कर्मचारियों का भी बीमा अनिवार्य
नियमावली में यह भी प्रावधान किया गया है कि टूर ऑपरेटर या एजेंसी को अपने सभी कर्मचारियों का कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कराना होगा। इससे दुर्घटना की स्थिति में कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
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निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत हर जिले में जिलाधिकारी या नामित अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति बनाई जाएगी। इसके अलावा जिला पर्यटन विकास अधिकारी की अध्यक्षता में तकनीकी समिति भी गठित होगी। हर ट्रैकिंग रूट की “धारण क्षमता” तय की जाएगी, ताकि अधिक भीड़ से पर्यावरण और सुरक्षा पर असर न पड़े। नियमों का उल्लंघन करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना, पंजीकरण निलंबन या रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एडवेंचर टूरिज्म को मिलेगी नई दिशा
सीसीएफ इको टूरिज्म उत्तराखंड वन विभाग पीके पात्रो के अनुसार, यह नियमावली राज्य में साहसिक पर्यटन को सुरक्षित और अनुशासित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल ट्रैकर्स का भरोसा बढ़ेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की पहचान एक सुरक्षित एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में मजबूत होगी।
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भविष्य की ओर बड़ा कदम
उत्तराखंड ट्रैकिंग नियमावली 2026 केवल नियमों का दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के एडवेंचर टूरिज्म को नई दिशा देने की पहल है। सुरक्षा, पारदर्शिता, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संतुलन जैसे पहलुओं को केंद्र में रखकर बनाई गई यह नीति आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश का सबसे भरोसेमंद ट्रैकिंग गंतव्य बना सकती है।

