Venezuela Crisis: अमेरिकी हमले से कांपा वेनेजुएला, क्या बचाने के लिए आगे आएगा कोई देश?
US Attack Venezuela: अमेरिका के कथित हमले के बाद वेनेजुएला संकट में फंस गया है। राजधानी काराकस में सिलसिलेवार धमाकों से पूरे देश में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आपातकाल लागू कर दिया गया। हालात तेजी से टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं और सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका ने दबाव और बढ़ाया, तो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ आखिर कौन से देश खुलकर खड़े होंगे?
शनिवार तड़के काराकस के अलग-अलग इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें गूंजीं। रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिणी काराकस जहां एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है वहां बिजली गुल हो गई। महीनों से अमेरिकी कार्रवाई की चेतावनियों के बीच यह घटनाक्रम हालात की गंभीरता को दिखाता है। अब वैश्विक कूटनीति की नजरें इस पर टिकी हैं कि संकट की घड़ी में मादुरो सरकार को वास्तविक समर्थन कहां से मिलेगा।
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धमाकों के बाद आपातकाल
धमाकों के तुरंत बाद वेनेजुएला में इमरजेंसी लागू कर दी गई। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और राजधानी से लेकर संवेदनशील ठिकानों तक निगरानी बढ़ा दी गई है। सरकार का कहना है कि देश की संप्रभुता पर हमला हुआ है और हर स्तर पर जवाबी तैयारी की जा रही है।
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गिरफ्तारियों से बढ़ी टकराव की आग
इन धमाकों से पहले वेनेजुएला ने पांच अमेरिकी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद वॉशिंगटन की ओर से सख्त संकेत मिले। बीते हफ्तों में अमेरिका ने कैरेबियाई क्षेत्र में भारी सैन्य तैनाती की न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन, जासूसी विमान और करीब 15,000 सैनिक। अमेरिका ने ड्रग तस्करी के आरोपों के तहत कई नावों पर कार्रवाई की, जिनमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई। इसके अलावा वेनेजुएला के तट के पास एक तेल टैंकर की जब्ती ने तनाव और बढ़ा दिया।
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रूस: पुराना दोस्त, पर फिलहाल सीमित दखल
रूस लंबे समय से वेनेजुएला का रणनीतिक साझेदार रहा है आर्थिक मदद, सैन्य उपकरण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन देता रहा है। लेकिन मौजूदा हालात अलग हैं। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच फंसा रूस इस वक्त किसी नए बड़े सैन्य जोखिम से बचता दिख रहा है। अक्टूबर में मादुरो की मदद की अपील के बावजूद, अब तक समर्थन बयानों और फोन कॉल्स तक सीमित रहा है।
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विरोध, पर सीधी भिड़ंत से दूरी- चीन
चीन अमेरिकी कार्रवाई का विरोध तो कर रहा है, लेकिन सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है। तेल संसाधनों के कारण वेनेजुएला बीजिंग के लिए अहम है, फिर भी अमेरिका से सीधी टक्कर चीन की रणनीति में नहीं दिखती। विशेषज्ञों के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर चीन संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर मुद्दा उठाएगा, लेकिन सैन्य मदद की संभावना बेहद कम है।
कोलंबिया खुलकर मादुरो के साथ
इस संकट में कोलंबिया वेनेजुएला के समर्थन में सामने आया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति ने आरोप लगाया है कि अमेरिका मिसाइलों से हमला कर रहा है। कोलंबिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग का ऐलान किया है। UNSC का अस्थायी सदस्य होने के नाते उसकी आवाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम मानी जा रही है।
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वैचारिक समर्थन, व्यावहारिक सीमाएं
ईरान और वेनेजुएला के रिश्ते वैचारिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन ईरान खुद आंतरिक संकट विरोध प्रदर्शन, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। ऐसे में उसकी मदद बयानों से आगे जाएगी या नहीं, यह सवाल बना हुआ है। वहीं क्यूबा वेनेजुएला पर काफी हद तक निर्भर है और मादुरो सरकार की खुफिया व सैन्य संरचना पर उसका प्रभाव माना जाता है। वैचारिक रिश्ते गहरे हैं, लेकिन क्यूबा की कमजोर अर्थव्यवस्था किसी बड़े संघर्ष में कूदने से रोक सकती है।
आगे क्या?
काराकस में धमाकों के बाद तस्वीर साफ है वेनेजुएला पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन ठोस सैन्य समर्थन फिलहाल अनिश्चित है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि कूटनीतिक समर्थन कितनी दूर तक जाता है और क्या कोई देश मादुरो सरकार के लिए ढाल बनने का जोखिम उठाता है।

