Ex-servicemen Event: देहरादून में गोरखा एसोसिएशन का 75वां वर्ष, सीएम धामी ने की प्रतिमा अनावरण

Ex-servicemen Event: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ऑल इंडिया गोरखा एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन (AIGESWA) के 75वें स्थापना दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैरिस्टर अरि बहादुर गुरूंग जी की प्रतिमा का अनावरण कर गोरखा समाज के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन की स्मारिका का विमोचन करते हुए संगठन की 75 वर्ष की गौरवमयी यात्रा को सलाम किया। कार्यक्रम में माननीय कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर सहित अनेक सम्मानित प्रतिनिधि और पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
गोरखा समुदाय के अग्रदूत को श्रद्धांजलि
समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैरिस्टर अरि बहादुर गुरूंग जी की प्रतिमा का अनावरण किया। अरि बहादुर गुरूंग गोरखा समाज के उन महान नेताओं में से एक थे जिन्होंने न सिर्फ समाज को संगठित किया, बल्कि शिक्षा, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा के क्षेत्रों में नई दिशा प्रदान की। उनकी प्रतिमा का अनावरण गोरखा समाज के गौरवशाली इतिहास के प्रति सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक बताया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गुरूंग जी जैसे नेताओं की दूरदृष्टि और सेवा भावना आज भी समाज को मजबूत बनाती है। उनके विचार और योगदान केवल गोरखा समाज ही नहीं, बल्कि देश की एकता और सुरक्षा के लिए मार्गदर्शक हैं।
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75 वर्षों की गौरवमयी यात्रा, स्मारिका का विमोचन
सीएम धामी ने AIGESWA की स्मारिका का विमोचन करते हुए संगठन के 75 वर्षों की यात्रा का विस्तृत विवरण पढ़ा। स्मारिका में गोरखा पूर्व सैनिकों के बलिदान, योगदान और समाज upliftment से जुड़े अनेक अध्याय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्मारिका न केवल इतिहास का दस्तावेज है, बल्कि नई पीढ़ी को प्रेरित करने का माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि गोरखा समाज हमेशा से राष्ट्र सेवा और सैन्य परंपराओं में अग्रणी रहा है। कई दशकों से गोरखा जवान भारतीय सेना की रीढ़ बने हुए हैं। वन, सीमा, युद्ध, आपदा—हर परिस्थिति में गोरखा सैनिकों ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च योगदान दिया है।
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सीमाओं के सिपाही और विकास के साथी
सीएम धामी ने अपने संबोधन में कहा कि गोरखा समाज न केवल सीमाओं पर, बल्कि समाज निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और राज्य विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में गोरखा समुदाय की ऐतिहासिक उपस्थिति और श्रमशीलता ने राज्य की प्रगति में अहम भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि गोरखा जवानों की बहादुरी दुनिया भर में मिसाल है। गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का गौरव है और उनके ‘कायमर साहस’ का इतिहास सदियों से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार गोरखा समुदाय के सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
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कल्याण योजनाओं में गोरखा समाज को प्राथमिकता
इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और रिटायर्ड डिफेंस कर्मियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि सरकार सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवारों की आवश्यकताओं को समझती है, और इसी को ध्यान में रखते हुए कई कल्याणकारी योजनाएँ लागू की गई हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गोरखा समुदाय के उत्थान के लिए रोजगार, शिक्षा, आर्थिक सहायता और सम्मान से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। गोरखा सैनिकों की वीरता की कहानियाँ न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश की आँखों का तारा हैं, इसलिए उनकी विरासत को संरक्षित करना सरकार का धर्म है।
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सामूहिक सम्मान का समर्पित मंच
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, जो स्वयं सेना से जुड़े रहे हैं, ने गोरखा समुदाय के वीरता इतिहास को याद करते हुए उन्हें भारतीय सेना की ‘शान और जान’ बताया। विधायक सविता कपूर ने भी गोरखा सैनिकों की शक्ति, शौर्य और अनुशासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तराखंड का विकास गोरखा समाज के योगदान के बिना अधूरा है।
उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी अधिक गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम स्थल तालियों, सम्मान, राष्ट्रभक्ति और भावनात्मक पलों से भरा रहा।

