Virendra Singh Basoya: Virendra Singh Basoya brought to India from Dubai in major drug trafficking case
Virendra Singh Basoya: भारतीय एजेंसियों ने ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में बड़ी कामयाबी हासिल की है। गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि ड्रग तस्करी के मामले में आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को UAE से भारत लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने वीेरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) को ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े मामले में वॉन्टेड घोषित किया था।
सोशल मीडिया पोस्ट में अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार की नशीले पदार्थों के प्रति ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति के तहत, एजेंसियां विदेशों में छिपे तस्करों का पता लगा रही हैं और उनके नेटवर्क को खत्म कर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराधी दुनिया में कहीं भी छिप जाएं, वे भारतीय कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।
कौन हैं वीरेंद्र सिंह बसोया?
पुणे में एक हाई-प्रोफाइल ड्रग मामले में वीरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) का नाम सामने आया है। NCB के दस्तावेजों के अनुसार, जांच एजेंसियों को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि वह गैर-कानूनी ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए भारी मात्रा में मेफेड्रोन की देश से बाहर तस्करी करने की योजना बनाई जा रही थी।
लंदन में मेफेड्रोन की एक बड़ी खेप भेजने की कथित साजिश की जांच के दौरान उसका नाम सामने आया। जांच के हिस्से के तौर पर, एजेंसियों ने लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट नेटवर्क की भूमिकाओं की भी बारीकी से जांच की।
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970 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त
पुलिस जांच के अनुसार, 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में एक ऑपरेशन के दौरान दिवेश चरणजीत भूटानी और संदीपकुमार राजपाल बसोया को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से लगभग 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया था।
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया कि जब्त की गई ड्रग्स जो भारी मात्रा में थी, को विदेश भेजा जाना था। जांच में ‘डेल्टा लॉजिस्टिक्स’ के जरिए कंसाइनमेंट की व्यवस्था करने की योजना का पता चला। मामले के इसी पहलू ने जांच में वीरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) की कथित भूमिका को सामने लाया।
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लंदन भेजी जाने वाली ड्रग्स की खेप (Virendra Singh Basoya)
जांच के अनुसार, मेफेड्रोन की जब्त खेप को लंदन भेजने की कथित योजना थी। एजेंसियों का आरोप है कि नेटवर्क में शामिल कुछ लोग खास निर्देशों के आधार पर काम कर रहे थे। इस मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स से जुड़े संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी गिरफ्तार किया गया था।
जांच इस बात पर केंद्रित थी कि इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स की खरीद और पैकेजिंग से लेकर कंसाइनमेंट को संभालने और उसे विदेश भेजने तक की पूरी प्रक्रिया को कैसे अंजाम दिया जा रहा था।
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रेड कॉर्नर नोटिस के बाद UAE में गिरफ्तारी
वीरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके बाद, उन्हें UAE में गिरफ़्तार किया गया और भारत सरकार की पहल पर उन्हें भारत वापस लाया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 4310 से भारत लाया गया। भारतीय एजेंसियां अब उनसे पूछताछ करके कथित ड्रग नेटवर्क, सप्लाई चेन और विदेशों में मौजूद संपर्कों से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा सकती हैं।
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बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस
इस मामले में एक और अहम नाम वीरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) के बेटे ऋषभ का सामने आया है। खबरों के मुताबिक, उनके खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है और माना जा रहा है कि वह अभी विदेश में हैं।
वीरेंद्र बसोया की भारत वापसी को ड्रग तस्करी के खिलाफ एजेंसियों की एक बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस मामले में आरोपों और जांच के नतीजों को अंतिम न्यायिक कार्यवाही के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि वीरेंद्र सिंह बसोया (Virendra Singh Basoya) के खिलाफ आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और कथित नेटवर्क से जुड़े और कितने नाम सामने आते हैं।

