AI education started in government schools of Neemuch, 1500 students will get training in modern technology

Smart Education: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की छवि बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नीमच जिले के जावद क्षेत्र में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। ‘प्रोजेक्ट दीप’ नामक इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार-उन्मुख बनाना है। दावा है कि जावद प्रदेश का पहला ऐसा क्षेत्र होगा, जहां सरकारी स्कूलों में एआई की व्यवस्थित शिक्षा दी जाएगी।
प्रोजेक्ट दीप की अनोखी पहल
जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने बताया कि 9 सितंबर से शुरू हुए ‘प्रोजेक्ट दीप’ के तहत पहले चरण में 1,500 विद्यार्थियों को एआई की शिक्षा दी जाएगी। ये विद्यार्थी कक्षा 9वीं से 12वीं तक के होंगे और उन्हें पूरे वर्ष के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण मिलेगा। यह प्रशिक्षण उनके अपने स्कूलों में ही आयोजित होगा, ताकि बच्चे नियमित पढ़ाई के साथ इस कोर्स को सहजता से पूरा कर सकें।
सखलेचा ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि जावद का हर बच्चा 18 साल की उम्र तक आत्मनिर्भर बने। इस कोर्स में ऑनलाइन बिजनेस, डिजिटल फ्रीलांसिंग, टैक्स रिटर्न फाइलिंग, नेटवर्क लिंक डेवलपमेंट और लैंग्वेज लर्निंग जैसे विषय शामिल हैं। इसके जरिए विद्यार्थी न केवल तकनीकी दक्षता हासिल करेंगे, बल्कि भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए भी तैयार होंगे।”
दो चरणों में मिलेगा प्रशिक्षण
प्रोजेक्ट दीप के लिए जावद के 30 सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक आईसीटी (इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) लैब तैयार की गई हैं। प्रशिक्षण दो चरणों में होगा। पहले छह महीनों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी और डिजिटल कौशल सिखाया जाएगा। अगले छह महीनों में विषय-विशेष की पढ़ाई होगी, जिसमें एआई के विभिन्न पहलुओं जैसे मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन लैब्स में अत्याधुनिक उपकरण और हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों को भी बड़े शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा का अनुभव मिलेगा।
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शिक्षा से लेकर रोजगार तक नए अवसर
एआई विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल शिक्षा के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रों में भी लाभकारी होगी। एआई की समझ बच्चों को खेती, स्वास्थ्य सेवाओं और छोटे-बड़े व्यवसायों में नए अवसर प्रदान कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती है।
वैज्ञानिक डॉ. विजय भटकर और विचारक विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल न केवल बच्चों को रोजगार के नए विकल्प देगी, बल्कि ग्रामीण समाज को भी तकनीक की मुख्यधारा से जोड़ेगी।
ग्रामीण शिक्षा में नई इबारत
मध्य प्रदेश में अक्सर सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन जावद का यह प्रोजेक्ट नई मिसाल पेश कर रहा है। यह पहल दिखाती है कि अगर इच्छाशक्ति और सही योजना हो, तो सरकारी शिक्षा तंत्र को मजबूत और आधुनिक बनाया जा सकता है।
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स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यह कदम बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करेगा और उन्हें बड़े शहरों या निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। छात्रों में भी इस कोर्स को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई छात्रों ने कहा कि वे एआई सीखकर अपनी पढ़ाई के साथ डिजिटल रोजगार के क्षेत्र में भी कदम रखना चाहते हैं।
आत्मनिर्भर भविष्य की ओर
प्रोजेक्ट दीप केवल एक शिक्षा कार्यक्रम नहीं, बल्कि जावद क्षेत्र के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की राह खोलने वाली पहल है। इस प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के बाद उम्मीद है कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के मॉडल को अपनाया जाएगा।
सरकारी स्कूलों में एआई शिक्षा की शुरुआत से यह साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार और स्थानीय नेतृत्व ग्रामीण बच्चों को तकनीक की दुनिया से जोड़ने और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए गंभीर है। नीमच का यह कदम ग्रामीण भारत में डिजिटल क्रांति की ओर एक मजबूत और प्रेरणादायक पहल बन सकता है।

