Prayagraj News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, फोन पर बोले-हम आपके साथ हैं
Akhilesh Yadav supports Shankaracharya: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। प्रयागराज में धरने पर बैठे शंकराचार्य से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने फोन पर बात कर उनका हाल जाना और उन्हें समर्थन देने की बात कही। अखिलेश यादव के इस कदम के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।
फोन पर बातचीत के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पीड़ा अखिलेश यादव के सामने रखी और कहा कि वह अपनी लड़ाई ‘अभिमन्यु की तरह’ अकेले लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक हिंदू को गंगा स्नान करने से रोका गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
Also Read: अपर्णा यादव से तलाक लेंगे प्रतीक यादव, जानिए पूरा सच
अखिलेश यादव ने जताया समर्थन
सोमवार को अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से फोन पर बातचीत की। उन्होंने शंकराचार्य से कहा कि समाजवादी पार्टी इस मामले में उनके साथ खड़ी है। अखिलेश यादव ने जल्द ही उनसे मुलाकात करने की बात भी कही। इस बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने शंकराचार्य के स्वास्थ्य और धरने की स्थिति के बारे में जानकारी ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज को अनदेखा नहीं किया जाएगा।
‘एक हिंदू को गंगा स्नान से रोका गया’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके साथ जो हुआ, वह किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘इन्होंने एक हिंदू बच्चे को गंगा स्नान करने से वंचित कर दिया। मैं इस अन्याय के खिलाफ खड़ा हूं।’ उन्होंने साफ कहा कि वह इस लड़ाई को पीछे हटकर नहीं, बल्कि पूरे साहस के साथ लड़ेंगे।
Read More: धरने की शुरुआत और अन्न-जल का त्याग! शंकराचार्य ने उठाया प्रशासन को चौंकाने वाला कदम
धरने की वजह क्या है?
दरअसल, रविवार को मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ संगम तट तक पालकी ले जाना चाहते थे। इसी दौरान पुलिस और प्रशासन से उनके समर्थकों की नोंकझोंक हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने पालकी को आगे बढ़ने से रोक दिया। इससे नाराज होकर शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए लौट आए और अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, ताकि उन्हें सबक सिखाया जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे संतों को पूरी वीआईपी व्यवस्था के साथ स्नान कराया गया, लेकिन उन्हें रोका गया। शंकराचार्य ने इसे प्रशासन का ‘दोहरा चरित्र’ बताया।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
हत्या की साजिश का दावा
शंकराचार्य ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि मौनी अमावस्या के दिन उनकी हत्या की साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके भक्तों को जानबूझकर संकट में डाला गया। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है और अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
भक्तों ने लगाए बदसलूकी के आरोप
शंकराचार्य के भक्तों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की और लाठीचार्ज किया। उनका कहना है कि उन्हें जबरन घसीटकर हटाया गया। वहीं, पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे और किसी के साथ जानबूझकर गलत व्यवहार नहीं किया गया।
प्रोटोकॉल के तहत स्नान की मांग
इस पूरे घटनाक्रम से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम स्नान करने से फिलहाल इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक पुलिस और प्रशासन उन्हें पूरे प्रोटोकॉल के साथ स्नान नहीं कराते, तब तक वह गंगा स्नान नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि संतों के सम्मान और धार्मिक परंपराओं की रक्षा जरूरी है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
सियासत हुई तेज
अखिलेश यादव के समर्थन के बाद यह मुद्दा अब पूरी तरह सियासी हो गया है। विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष प्रशासन के फैसलों का बचाव कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। सभी की नजरें अब प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या शंकराचार्य को प्रोटोकॉल के तहत संगम स्नान कराया जाएगा, या यह विवाद और गहराएगा यह आने वाला समय ही बताएगा।

