Naxal Free Bastar: 'बस्तर में अब बंदूक नहीं, विकास की आवाज़ गूंजेगी' - अमित शाह का बड़ा दावा, नक्सल कैंपों की जगह बनेंगे विकास केंद्र
Naxal Free Bastar: अमित शाह (Amit Shah) ने छत्तीसगढ़ के बस्तर दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि देश को आजादी भले ही दशकों पहले मिल गई थी, लेकिन बस्तर में ‘असली आजादी’ (Naxal Free Bastar) का सूर्योदय अब हुआ है। नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई और क्षेत्र में शांति स्थापित होने के बाद पहली बार बस्तर पहुंचे गृह मंत्री ने साफ कहा कि अब यह इलाका हिंसा नहीं बल्कि विकास और जनसेवा के नए मॉडल के रूप में पहचाना जाएगा। गृह मंत्री ने नेतानार गांव में पहले जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। खास बात यह रही कि यह केंद्र पहले एक सुरक्षा कैंप हुआ करता था, जिसे अब सरकारी सेवाओं और आदिवासी कल्याण से जोड़कर नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इस कदम को सरकार बस्तर में ‘बंदूक से विकास’ की ओर बढ़ते बदलाव के प्रतीक के रूप में पेश कर रही है।
’31 मार्च 2026 के बाद बदला बस्तर का इतिहास’
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि 21 जनवरी 2024 और 31 मार्च 2026 नक्सल उन्मूलन के इतिहास में हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 में सरकार ने एक बंद कमरे में तय किया था कि मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद (Naxal Free Bastar) को खत्म करना है। शाह ने कहा कि उस समय कई लोगों ने इस लक्ष्य को कठिन बताया था, लेकिन रणनीति और मजबूत कार्ययोजना के जरिए यह संभव हुआ। उन्होंने दावा किया कि अगस्त तक इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर दी गई थी और अब बस्तर नक्सल-मुक्त भविष्य की ओर बढ़ चुका है। गृह मंत्री ने कहा, ‘मां दंतेश्वरी की कृपा से आज नक्सल-मुक्त बस्तर का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।’
सुरक्षा कैंप अब बनेंगे सेवा केंद्र
गृह मंत्री ने बस्तर (Naxal Free Bastar) के लिए सरकार की नई योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में मौजूद लगभग 196 सुरक्षा कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ साल के भीतर आधुनिक जन सुविधा केंद्रों में बदला जाएगा। इन केंद्रों का डिजाइन तैयार करने की जिम्मेदारी National Institute of Design को दी जाएगी। यहां बैंकिंग सेवाएं, सरकारी योजनाओं की जानकारी, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। सरकार का उद्देश्य उन इलाकों में प्रशासन और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है, जहां कभी नक्सल गतिविधियों के कारण सरकारी व्यवस्था लगभग ठप रहती थी।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
‘जहां गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास होगा’
अमित शाह ने कहा कि एक समय ऐसा था जब बस्तर में पुलिसकर्मियों की हत्या होती थी, स्कूल और अस्पतालों को नुकसान पहुंचाया जाता था और विकास कार्यों को रोक दिया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद (Naxal Free Bastar) की वजह से दशकों तक क्षेत्र के लोगों को बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। अब सरकार उसी क्षेत्र में विकास आधारित मॉडल तैयार करना चाहती है। गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर के आदिवासी परिवारों को वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो देश के बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को मिलती हैं।
आदिवासी समाज को विकास से जोड़ने पर जोर
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में आदिवासी नेता गुंडा धर (Gunda Dhur) को याद किया और 1910 के भूमकाल विद्रोह का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बस्तर की यह भूमि देश के लिए तीर्थ समान है और यहां के लोगों ने हमेशा संघर्ष और स्वाभिमान की मिसाल पेश की है। शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल हथियारबंद नक्सलियों का सफाया करना नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना भी था। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विकास कार्यों में सहयोग करें और क्षेत्र को आगे बढ़ाने में भागीदारी निभाएं।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
डेयरी मॉडल से रोजगार बढ़ाने की तैयारी
गृह मंत्री ने बस्तर (Naxal Free Bastar) में डेयरी विकास को लेकर भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि National Dairy Development Board के सहयोग से हर गांव तक डेयरी नेटवर्क पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। सरकार आदिवासी महिलाओं को दो-दो पशु उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करेगी ताकि वन उपज के साथ डेयरी को भी रोजगार का मजबूत साधन बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और लोगों की आय बढ़ेगी।
‘बस्तर की नई पहचान बनेगी विकास’
कार्यक्रम में विष्णुदेव साय (Vishnu Deo Sai), विजय शर्मा (Vijay Sharma) और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार की कोशिश है कि बस्तर को हिंसा की पहचान से बाहर निकालकर विकास, पर्यटन और आदिवासी संस्कृति के केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए। राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सरकार अपनी योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करती है तो बस्तर आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े परिवर्तन मॉडल के रूप में उभर सकता है।

