Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment: Ayodhya Ram Mandir Trust meeting discussing CEO appointment under Tirupati model after donation theft controversy.
Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन को और ज्यादा सिस्टमैटिक और ट्रांसपेरेंट बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट ने अयोध्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) करने के लिए तीन मेंबर की हाई-पावर कमेटी बनाई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में डोनेशन चोरी के आरोपों ने राम मंदिर के एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्चर की ओर देश का ध्यान खींचा है। ट्रस्ट अब तिरुपति मंदिर के सफल एडमिनिस्ट्रेटिव मॉडल की तरह एक प्रोफेशनल CEO अपॉइंट करने की तैयारी कर रहा है।
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CEO चयन के लिए बनी तीन मेंबर की हाई-पावर कमेटी
अयोध्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) करने का प्रोसेस फेयर और ट्रांसपेरेंट हो, यह पक्का करने के लिए ट्रस्ट ने तीन जाने-माने मेंबर की एक कमेटी बनाई है। इस कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सुरेश हावड़े शामिल हैं। कमेटी एलिजिबल कैंडिडेट को इवैल्यूएट करेगी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट को अपनी फाइनल रिकमेंडेशन देगी। इसके बाद ट्रस्ट CEO अपॉइंट करने पर फाइनल फैसला करेगा।
तिरुपति मॉडल को क्यों माना जाता है जरूरी?
देश के बड़े मंदिरों में, तिरुपति मंदिर का एडमिनिस्ट्रेशन सबसे सिस्टमैटिक माना जाता है। यह धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ मॉडर्न एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम को भी सफलतापूर्वक लागू करता है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए, अयोध्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) की प्रक्रिया शुरू की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि CEO की नियुक्ति से मंदिर का फाइनेंशियल मैनेजमेंट, सिक्योरिटी, भक्तों के लिए सुविधाएं और एडमिनिस्ट्रेटिव फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी।
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चढ़ावा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट ने बड़े उठाए कदम
हाल ही में चढ़ावा चोरी विवाद के बाद, ट्रस्ट ने कई अहम फैसले लिए। ट्रस्ट की मीटिंग में जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। कृष्ण मोहन को अंतरिम जनरल सेक्रेटरी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। मीटिंग के बाद, ट्रेजरर गोविंद देव गिरी ने मंदिर मैनेजमेंट में कुछ कमियों को माना और कहा कि इस घटना से लाखों राम भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस बैकग्राउंड में, अयोध्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) को एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
तीन घंटे की मीटिंग में किन मुद्दों पर हुई चर्चा? (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment)
राम जन्मभूमि कॉम्प्लेक्स के गेस्ट हाउस में हुई करीब तीन घंटे की मीटिंग में चढ़ावा मैनेजमेंट, सिक्योरिटी इंतजाम और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों पर डिटेल में चर्चा हुई। मीटिंग में महंत नृत्य गोपाल दास, गोविंद देव गिरि, विश्व तीर्थ प्रसन्नाचार्य, स्वामी परमानंद गिरि, जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती, कृष्ण मोहन, महंत दिनेंद्र दास और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट शशांक त्रिपाठी समेत कई खास सदस्य मौजूद थे। ट्रस्ट से जुड़े कुछ सीनियर अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया।
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CEO की नियुक्ति से क्या हो सकता है?
अगर अयोध्या राम मंदिर CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) सफलतापूर्वक हो जाती है, तो राम मंदिर के एडमिनिस्ट्रेशन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक प्रोफेशनल CEO मंदिर के रेवेन्यू और खर्च सिस्टम, भक्तों के लिए डिजिटल सर्विस, सिक्योरिटी, भीड़ मैनेजमेंट और ट्रांसपेरेंट एडमिनिस्ट्रेशन को एक नई दिशा दे सकता है। इसके अलावा, ट्रस्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए मॉनिटरिंग और अकाउंटेबिलिटी को मजबूत कर सकता है।
ट्रस्ट की साख मजबूत करने की कोशिश
चढ़ावा चोरी विवाद के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। अयोध्या राम मंदिर CEO की नियुक्ति (Ayodhya Ram Mandir CEO Appointment) के लिए बनी हाई-पावर कमेटी इस बात का संकेत देती है कि ट्रस्ट अब एक मॉडर्न, ट्रांसपेरेंट और अकाउंटेबल मैनेजमेंट सिस्टम अपनाने की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में पूरे देश की नजर कमेटी की सिफारिशों और CEO की नियुक्ति पर रहेगी।

