Farmers' tractor march blocks highway in Nagpur; Bachchu Kadu warns of nationwide shutdown.

Nagpur Tractor March: महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचाने वाला किसान आंदोलन एक बार फिर उफान पर है। प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और पूर्व विधायक ओमप्रकाश बाबाराव कडू उर्फ बच्चू कडू के नेतृत्व में बुधवार को नागपुर में विशाल किसान ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण नागपुर-हैदराबाद नेशनल हाईवे पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अमरावती, वर्धा, नागपुर, गढ़चिरौली, चंद्रपुर और यवतमाल जिलों के हजारों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ इस मार्च में शामिल हुए हैं। सुबह से ही हाईवे पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें दिखाई दीं और पूरा इलाका नारों और बैनरों से गूंज उठा। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी को लेकर दबाव बनाना है।
बच्चू कडू की चेतावनी — नहीं मानी मांगें तो होगा भारत बंद
ट्रैक्टर मार्च के बीच बच्चू कडू ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो आज (बुधवार) दोपहर रेलवे रोकने और ‘भारत बंद’ करने का फैसला लिया जाएगा।
कडू ने कहा, “हम पिछले कई महीनों से किसानों की कर्ज माफी और न्याय की मांग कर रहे हैं। सरकार से बार-बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उसने जानबूझकर इन मांगों को नजरअंदाज किया। आज पूरा महाराष्ट्र — किसान, खेतिहर मजदूर, मछुआरे, विकलांग और चरवाहे — नागपुर की सड़कों पर उतरकर इतिहास रच रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र के किसानों का आंदोलन है। उन्होंने आम जनता से इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।
कडू की प्रमुख मांगे — किसानों और मजदूरों के लिए न्याय
बच्चू कडू ने इस प्रदर्शन के जरिए सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं:
- किसानों की पूर्ण कर्ज माफी
- कृषि उत्पादों के लिए गारंटीकृत मूल्य प्रणाली
- सात गुना घाटे की नीति को समाप्त करना
- विकलांगों, मछुआरों, खेतिहर मजदूरों और चरवाहों के अधिकारों की रक्षा
उनका कहना है कि सरकार ने किसानों से चुनाव से पहले बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भुला दिया गया।
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किसान दंपती की आत्महत्या ने बढ़ाया आक्रोश
हाल ही में परभणी जिले में किसान सचिन जाधव और उनकी गर्भवती पत्नी की आत्महत्या ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। बच्चू कडू ने इस घटना को “सरकार की संवेदनहीनता” बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि हर उस किसान की पीड़ा है जो कर्ज और उपेक्षा के बोझ तले दबा हुआ है।
कडू के साथ किसान नेता राजू शेट्टी, वामनराव चटप और रविकांत तुपकर जैसे प्रमुख चेहरे भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए, जिससे आंदोलन को और बल मिला है।
अमरावती से नागपुर तक ‘महा एल्गार ट्रैक्टर मार्च’
अमरावती से शुरू हुआ यह महा एल्गार ट्रैक्टर मार्च वर्धा और बुटीबोरी होते हुए नागपुर पहुँचा, जहाँ हजारों किसानों ने हाईवे जाम कर दिया। कडू ने ऐलान किया कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो वे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास का घेराव करेंगे।
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मुख्यमंत्री फडणवीस ने आंदोलन को देखते हुए बच्चू कडू को मुंबई में बातचीत के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन उन्होंने यह निमंत्रण अस्वीकार कर दिया। कडू ने कहा कि “अब बैठकें नहीं, सिर्फ समाधान चाहिए।”
राज्य सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
नागपुर में ट्रैक्टर मार्च और सड़क जाम की स्थिति ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस और ट्रैफिक विभाग ने कई रूट डायवर्ट किए हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
कडू का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में किसान आंदोलन एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

