Officials inspecting donation boxes at Badrinath Temple amid the Badrinath Donation Counting Controversy investigation.
Badrinath Donation Counting Controversy:उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-पात्रों की नकदी गिनती को लेकर सामने आए Badrinath Donation Counting Controversy ने अब गंभीर रूप ले लिया है। मामले की जांच तेज कर दी गई है और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की चार सदस्यीय जांच समिति अगले दो दिनों के भीतर बदरीनाथ पहुंचकर जांच शुरू करेगी। समिति दान गिनती की पूरी प्रक्रिया, कर्मचारियों की भूमिका और उपलब्ध दस्तावेजों की गहन पड़ताल करेगी।
इस मामले के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और राजनीतिक दलों के बीच भी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। Badrinath Donation Counting Controversy को लेकर अब निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
कर्मचारियों से मांगा गया लिखित स्पष्टीकरण
Badrinath Donation Counting Controversy सामने आने के बाद बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने दान गिनती प्रक्रिया में शामिल अध्यक्ष के सरकारी पीए सहित अन्य कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था।
स्पष्टीकरण देने की समय-सीमा सोमवार देर रात तक तय की गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी निर्धारित समय के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सीईओ ने यह भी कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों की आय और संपत्ति की भी जांच कराई जा सकती है।
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कैसे होती है बदरीनाथ मंदिर में दान की गिनती?
Badrinath Donation Counting Controversy के बीच बीकेटीसी प्रशासन ने दान गिनने की आधिकारिक प्रक्रिया भी स्पष्ट की है।
मंदिर परिसर में कुल पांच दान-पात्र स्थापित हैं, जिनमें दो गर्भगृह के भीतर और तीन मंदिर परिसर के बाहर रखे गए हैं। जब दान-पात्र भर जाते हैं, तब इसकी सूचना मंदिर अधिकारी को दी जाती है।
इसके बाद मंदिर अधिकारी और प्रभारी अधिकारी की मौजूदगी में दान-पात्रों को निर्धारित स्थान पर ले जाया जाता है। वहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में नकदी की गिनती की जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहती है।
गिनती पूरी होने के बाद बैंक कर्मचारियों को बुलाकर पूरी राशि उनके सुपुर्द की जाती है। बैंक से रसीद प्राप्त होने के बाद ही प्रक्रिया पूरी मानी जाती है। इस दौरान इच्छुक श्रद्धालुओं को भी दान की गिनती में सहयोग करने का अवसर दिया जाता है।
पीए की नियुक्ति और जिम्मेदारियों पर उठे सवाल
Badrinath Donation Counting Controversy के बाद सबसे अधिक सवाल अध्यक्ष के सरकारी पीए की नियुक्ति और उनकी भूमिका को लेकर उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में उनकी नियुक्ति इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के एकल पद पर हुई थी। बाद में वर्ष 2018 में उन्हें वैयक्तिक सहायक (पीए) बनाया गया, जबकि यह पद सामान्यतः सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाता है।
वर्ष 2023 में सेवा नियमावली में संशोधन के बाद उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी बनने का रास्ता भी खुल गया। अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि अध्यक्ष के निजी सहायक होने के बावजूद उन्हें दान-पात्रों की नकदी गिनने जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई।
यही प्रश्न Badrinath Donation Counting Controversy का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आया है।
जांच समिति करेगी दस्तावेजों और प्रक्रिया की पड़ताल
चार सदस्यीय जांच समिति बदरीनाथ पहुंचने के बाद दान गिनती से जुड़े सभी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों के बयान और पूरी प्रक्रिया का विस्तृत परीक्षण करेगी।
Badrinath Donation Counting Controversy की जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं तथा कहीं किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या प्रक्रियागत लापरवाही तो नहीं हुई।
यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जनाक्रोश बढ़ा, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
Badrinath Donation Counting Controversy सामने आने के बाद बदरीनाथ क्षेत्र में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के अध्यक्ष उमेश सती ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मंदिर समिति और दान व्यवस्था को लेकर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
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विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने उठाए सवाल
Badrinath Donation Counting Controversy को लेकर राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए हैं।
कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने कहा कि केदारनाथ मंदिर में सोना चोरी के आरोपों के बाद अब बदरीनाथ में दान गिनती विवाद सामने आया है। उन्होंने पूरे मामले की एसआईटी जांच कराने की मांग की।
वहीं कांग्रेस नेताओं दिगंबर बिष्ट और प्रकाश नेगी ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक बीकेटीसी अध्यक्ष को इस पूरी प्रक्रिया से अलग रखा जाए, क्योंकि आरोप उनके सरकारी पीए पर लगाए गए हैं।
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यूकेडी ने रखीं कई अहम मांगें
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भी Badrinath Donation Counting Controversy को गंभीर बताते हुए कई मांगें उठाई हैं।
यूकेडी नेता वृजमोहन सजवाण ने बीकेटीसी के सीईओ को ज्ञापन सौंपकर आरोपी निजी सचिव को तत्काल निलंबित करने, उच्चस्तरीय जांच कराने और दान-पात्रों की गिनती से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
इसके अलावा उन्होंने वीआईपी दर्शन से प्राप्त आय का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा मंदिर समिति के अधिकारियों की संपत्ति की जांच कर उसे सार्वजनिक करने की भी मांग की।
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श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
धार्मिक स्थलों में आने वाला दान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक होता है। ऐसे में Badrinath Donation Counting Controversy ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाती है, तो श्रद्धालुओं का विश्वास फिर से मजबूत किया जा सकता है।

