Bijnor government land encroachment case as social activist Israr Ahmad demands action against alleged land mafia.
Bijnor Government Land Encroachment: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद क्षेत्र में सरकारी अधिग्रहित जमीन को बचाने की लड़ाई एक समाजसेवी अकेले लड़ रहे हैं। कल्हेड़ी निवासी समाजसेवी इसरार अहमद का आरोप है कि वर्षों पहले सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई सरकारी जमीन पर दबंग भूमाफिया कब्जा करने में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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1991 में सड़क निर्माण के लिए हुआ था भूमि अधिग्रहण
इसरार अहमद के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 जुलाई 1991 को जारी सरकारी गजट के तहत धारा-4 के अंतर्गत ग्राम जलालाबाद, धनौरा, राहुखेड़ी, कोरा, रामपुर, बनवारी, हर्षवाड़ा-ए और हर्षवाड़ा-बी की भूमि सड़क निर्माण के उद्देश्य से अधिग्रहित की थी। उस समय प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा भी दिया गया था। (Bijnor Government Land Encroachment)
हालांकि, अधिग्रहण के बाद संबंधित विभागों द्वारा भूमि का दाखिल-खारिज और सीमांकन (निशानदेही) नहीं कराया गया। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
दाखिल-खारिज और सीमांकन न होने से बढ़ा विवाद
समाजसेवी का आरोप है कि राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही के चलते आज तक अधिग्रहित भूमि का रिकॉर्ड संबंधित विभाग के नाम दर्ज नहीं हो पाया। यही वजह है कि भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन (Bijnor Government Land Encroachment) पर अवैध कब्जा कर लिया है और कई स्थानों पर लगाए गए सरकारी पिलर तक हटा दिए गए हैं।
इसरार अहमद का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पूरी सरकारी जमीन पर कब्जा हो सकता है और बाद में उसे खाली कराना बेहद मुश्किल होगा।
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डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक भेजी जा चुकी हैं शिकायतें
इसरार अहमद ने बताया कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक वह जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी नजीबाबाद, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और अन्य अधिकारियों को कई बार शिकायत पत्र दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 28 जून को मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को भी विस्तृत शिकायत भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
उन्होंने शिकायत में कहा है कि अधिग्रहित भूमि का जल्द से जल्द पीडब्ल्यूडी के नाम दाखिल-खारिज कराया जाए और सरकारी जमीन (Bijnor Government Land Encroachment) से अवैध कब्जे हटाकर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
राजस्व परिषद तक पहुंचा मामला, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
जब स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इसरार अहमद ने राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश, लखनऊ में भी शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अभी तक अधिग्रहित भूमि का दाखिल-खारिज (Bijnor Government Land Encroachment) नहीं हुआ है और न ही प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कदम उठाया गया है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण भूमाफियाओं के हौसले लगातार बढ़ रहे हैं।
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कीमती सरकारी जमीन बेचने की आशंका
समाजसेवी ने दावा किया है कि कुछ भूमाफिया इस कीमती सरकारी जमीन (Bijnor Government Land Encroachment) को बेचने की कोशिश में लगे हुए हैं। यदि प्रशासन ने जल्द सीमांकन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी नहीं की तो सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अधिग्रहित भूमि को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए।
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प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
इसरार अहमद का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से लगातार सरकारी जमीन (Bijnor Government Land Encroachment) बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखना है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि अधिग्रहित भूमि का तत्काल सीमांकन कराया जाए, विभागीय रिकॉर्ड दुरुस्त किए जाएं और अवैध कब्जों को हटाकर सरकारी जमीन को भूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए।

