Chardham Yatra 2026: चमोली से उत्तरकाशी तक LPG का संकट? चारधाम यात्रा 2026 के लिए सरकार ने बनाया 'प्लान-बी', अब लकड़ी और बिजली से जलेंगे चूल्हे!
Chardham Yatra 2026: उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 के आगाज में अब महज 18 दिन शेष रह गए हैं। 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही इस यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है, लेकिन प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रा मार्ग पर ईंधन (Fuel) की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है। Chardham Yatra 2026 LPG Supply and Fuel Management के तहत राज्य सरकार ने इस बार गैस सिलेंडरों की संभावित कमी से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसमें पारंपरिक लकड़ी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ‘वैकल्पिक हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
अप्रैल में यात्रा शुरू होने से बढ़ा दबाव
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इस साल यात्रा अप्रैल के दूसरे सप्ताह में शुरू हो रही है, जबकि पिछले वर्षों में यह मई या जून में रफ्तार पकड़ती थी। समय से पहले शुरू हो रही यात्रा के कारण लॉजिस्टिक और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ना तय है। विशेष रूप से उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे ऊंचाई वाले जिलों में व्यावसायिक सिलेंडरों की खपत में भारी उछाल आने का अनुमान है।
Read More: उत्तराखंड ग्रामीण बैंक घोटाला, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला, मैनेजर समेत 12 दोषियों को सजा
1.11 लाख अतिरिक्त सिलेंडरों की जरूरत
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आकलन के अनुसार, यात्रा मार्ग से जुड़े 7 प्रमुख जिलों (हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी) में हर महीने लगभग 1,11,000 अतिरिक्त व्यावसायिक LPG सिलेंडरों की आवश्यकता होगी।
- दैनिक मांग: प्रतिदिन लगभग 3,500 अतिरिक्त सिलेंडर।
- प्रमुख जिले: उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में अकेले 15 से 16 हजार सिलेंडरों की मासिक मांग रहने वाली है।
आयुक्त खाद्य एवं आपूर्ति आनंद स्वरूप ने बताया कि ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक है, फिर भी एहतियात के तौर पर भारत सरकार को अतिरिक्त कोटे के लिए मांग पत्र भेज दिया गया है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
‘प्लान-बी’: लकड़ी की टालें और बिजली का सहारा
LPG पर निर्भरता कम करने के लिए पर्यटन विभाग ने होटल और ढाबा संचालकों से वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने की अपील की है।
- जलाऊ लकड़ी का भंडारण: वन विकास निगम ने राज्य के 26 प्रमुख केंद्रों (जैसे सोनप्रयाग, ज्योतिर्मठ, चंद्रबनी और रायवाला) पर 3,354 क्विंटल से ज्यादा जलाऊ लकड़ी का स्टॉक जमा कर लिया है। आपात स्थिति में यह लकड़ी होटल और ढाबों के लिए प्राथमिक ईंधन बनेगी।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: सचिव धीराज गर्ब्याल ने व्यावसायियों से इंडक्शन चूल्हे और अन्य बिजली से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करने को कहा है। इसके लिए ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा मार्ग पर बिजली की आपूर्ति 24 घंटे निर्बाध बनी रहे।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर भी पैनी नजर
ईंधन का संकट केवल रसोई तक सीमित नहीं है। पिछले यात्रा सीजन में उत्तराखंड में 5,14,016 वाहन पहुंचे थे। इस बार यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। वाहनों की इस भारी तादाद को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए मुख्य सचिव स्तर पर हर दूसरे दिन समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग और ऑयल कंपनियों के नोडल अधिकारी सीधे तौर पर रिफिलिंग सेंटरों की निगरानी कर रहे हैं।
उत्तराखंड की तमाम बड़ी खबर LIVE देखने के लिये क्लिक करे
सरकार की अपील
प्रशासन ने स्थानीय व्यापारियों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे ‘पैनिक बाइंग’ या जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा करने से बचें। अक्सर अफवाहों के चलते लोग संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग शुरू कर देते हैं, जिससे कृत्रिम संकट (Artificial Crisis) पैदा हो जाता है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, बस जनता को धैर्य और संयम दिखाने की जरूरत है।

