CJI Suryakant: गरीबों के लिए आधी रात तक कोर्ट में बैठ जाऊंगा…CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान!

CJI Suryakant : सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई एक सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने ऐसा बयान दिया जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर लोगों को न्याय दिलाना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अगर जरूरत पड़ी तो वे ऐसे वादियों के लिए आधी रात तक भी अदालत में बैठकर सुनवाई कर सकते हैं। CJI के इस बयान ने न्यायपालिका की संवेदनशीलता को एक बार फिर सामने ला दिया।
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सुनवाई का मामला और याचिका
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची एक याचिका पर विचार कर रहे थे। यह याचिका तिलक सिंह डांगी नाम के व्यक्ति ने केंद्र सरकार और कुछ अन्य पक्षों के खिलाफ दायर की थी। कोर्ट ने याचिका की सामग्री पढ़ते ही समझ लिया कि यह मामला बिना किसी ठोस आधार का है और केवल अदालत का समय खराब करने वाला है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसे तुरंत खारिज कर दिया।
अमीर बनाम गरीब – CJI की नाराजगी
याचिका को खारिज करने के साथ ही CJI सूर्यकांत ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि उनकी अदालत में ऐसे केस नहीं आने चाहिए जो बेवजह समय बर्बाद करते हैं। उन्होंने साफ कहा कि आमतौर पर ऐसे बेकार मुकदमे अमीर और प्रभावशाली लोग ही दायर करते हैं, क्योंकि उनके लिए अदालत में बार-बार जाना कोई बड़ी बात नहीं होती। लेकिन उन गरीब लोगों के लिए अदालत में पहुंचना भी मुश्किल होता है जिन्हें वास्तव में न्याय की जरूरत होती है।
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गरीबों के लिए न्याय – CJI का संदेश
CJI सूर्यकांत ने कोर्ट में मौजूद लोगों से कहा, मैं यहां सबसे गरीब और सबसे कमजोर वादियों के लिए बैठा हूं। उनका दर्द समझना और उन्हें समय पर न्याय देना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अगर जरूरत पड़ी, तो मैं आधी रात तक भी कोर्ट में बैठ सकता हूं। लेकिन मैं उन मामलों पर समय नहीं दूंगा जो सिर्फ अदालत का समय खराब करने के लिए लाए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में कई गरीब लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने अधिकारों के लिए अदालत तक पहुंचने में बहुत कठिनाई होती है। पैसे की कमी, दूरी और कानूनी जानकारी की कमी के कारण वे न्याय से दूर रह जाते हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह कर्तव्य है कि उनके लिए रास्ते आसान किए जाएं और उन्हें समय पर न्याय मिले।
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CJI सूर्यकांत का राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर
CJI का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे हाल ही में भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश बने हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत हरियाणा के हिसार जिले के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा हुए और कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई कर वकील बने। अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर वे देश की सर्वोच्च अदालत के शीर्ष पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2025 को CJI पद की शपथ ली है। उनका कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।
न्यायपालिका और आम जनता के लिए उम्मीद
न्यायपालिका से जुड़े लोगों का मानना है कि CJI सूर्यकांत का गरीब और कमजोर लोगों के लिए दिया गया यह वादा आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इससे आम जनता के बीच यह संदेश भी जाएगा कि देश की सर्वोच्च अदालत उन लोगों के साथ खड़ी है जिन्हें वास्तव में न्याय की सबसे ज्यादा जरूरत है।
लंबित मामलों के बीच उम्मीद की किरण
देश में लाखों मामलों की लंबित स्थिति को देखते हुए CJI का यह रुख एक उम्मीद की किरण की तरह है। अदालत में देर रात तक बैठकर सुनवाई करना यह दिखाता है कि न्यायपालिका केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि व्यवहार में भी कमजोर वर्गों के लिए न्याय की व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।

