Paper Leak Case: पेपर लीक कांड, शुरुआत से ही संदिग्ध रही असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की भूमिका

Paper Leak Case: उत्तराखंड की स्नातक स्तरीय परीक्षा में पेपर लीक का मामला लगातार गहराता जा रहा है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि इस पूरे प्रकरण में मुख्य आरोपी खालिद के साथ-साथ असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन की भूमिका भी उतनी ही संदिग्ध रही है। शुरुआती साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि सुमन ने न केवल खालिद से प्रश्नपत्र प्राप्त किए, बल्कि सिर्फ 10 मिनट में 11 सवाल हल करके वापस भेज भी दिए, जो उनकी संलिप्तता पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
वॉट्सऐप चैट ने खोला राज
जांच में सामने आया है कि सुबह 7:55 बजे खालिद ने सुमन को संदेश भेजा कि उसकी बहन का पेपर है और मदद करनी है।
8:02 बजे सुमन ने “ओके” लिखकर जवाब दिया।
इसके बाद—
- 11:35 बजे सुमन के मोबाइल पर प्रश्नपत्र के तीन पेज भेजे गए
- 11 प्रश्नों वाले इन पन्नों का सुमन ने तुरंत हल तैयार किया
- 11:45 बजे, यानी मात्र 10 मिनट में, सुमन ने हाथ से लिखे उत्तर खालिद को वापस भेज दिए
एसआईटी के अनुसार इतने कम समय में प्रश्न हल करना और भेज देना यह दर्शाता है कि सुमन पहले से इस प्रक्रिया से परिचित थी या इसमें उसकी मंशा शामिल थी।
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ओएमआर शीट देखने का दावा
सुमन ने पुलिस को बताया कि पेपर की दूसरी तरफ OMR शीट देखने पर उसे संदेह हुआ कि यह परीक्षा का “चल रहा पेपर” है।
लेकिन सवाल ये उठता है—
- यदि सुमन को संदेह हुआ था,
- तो उसने अधिकृत विभाग को सूचना क्यों नहीं दी?
- और बाद में उसने वही प्रश्न व उत्तर 12:28 बजे बाबी पंवार को व्हाट्सऐप पर क्यों भेजे?
जांच में खुलासा हुआ कि सुमन ने न केवल खालिद की मदद की बल्कि पेपर को आगे भी फॉरवर्ड किया, जो इसे एक संगठित कड़ी का हिस्सा दर्शाता है।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष
21 सितंबर को हुई स्नातक परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई।
एसआईटी के अनुसार—
- 11 बजे से पहले पेपर लीक की कोई सूचना नहीं थी
- डेढ़ बजे (1:30 PM) के बाद इंटरनेट मीडिया पर पेपर की पोस्ट्स दिखनी शुरू हुईं
- लेकिन सुमन को पेपर 11:35 बजे ही भेज दिया गया था
यह टाइमलाइन खुद ही लीक सिस्टम का बड़ा खुलासा करती है।
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टेंडर कार्य से शुरू हुई पहचान, वर्षों तक जारी रही बातचीत
जांच में पता चला कि—
- सुमन और खालिद की मुलाकात 2017–18 में हुई
- तब सुमन नगर निगम ऋषिकेश में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं
- खालिद CPWD में जेई के रूप में आलवेदर रोड का कार्य देख रहा था
- टेंडर कार्य के दौरान दोनों संपर्क में आए
- सुमन के 2022 में डिग्री कॉलेज में पदस्थ होने के बाद भी दोनों की बातचीत नियमित रूप से जारी रही
यह संपर्क भी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ।
बाबी पंवार को कॉल और संदेश भेजकर बढ़ा संदेह
जब सुमन को शक हुआ तो उसने—
- अपनी बहन सीमा से बात की
- फिर 12:21 बजे बाबी पंवार का नंबर मिलाया
- और 12:28 बजे प्रश्नपत्र और अपने लिखे उत्तर बाबी पंवार को भेज दिए
किसी विभाग को सूचना देने के बजाय “पेपर और उत्तर आगे भेजना” यह साबित करता है कि सुमन अपने स्तर पर मामले को छिपाने या आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी।
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बेरोजगार संघ के आंदोलन के बाद शुरू हुई CBI जांच
पेपर लीक मामले पर युवाओं में भारी आक्रोश था। बेरोजगार संघ ने परेड ग्राउंड में लगातार धरना प्रदर्शन किया।
4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद धरनास्थल पहुंचे और इसकी CBI जांच की संस्तुति की।
वर्तमान में—
- CBI जांच चल रही है
- कई संदिग्धों की भूमिका खंगाली जा रही है
- और जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां होने की संभावना है
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सुमन और खालिद—दोनों बराबर के दोषी?
जांच अधिकारियों के अनुसार—
- पेपर भेजने वाला खालिद था
- लेकिन हल करने और आगे भेजने वाली सुमन थी
- दोनों की गतिविधियों में तालमेल दिखा
- दोनों के बीच 7 साल पुरानी जान-पहचान थी
- और दोनों की भूमिका बिना एक-दूसरे के संभव नहीं थी
यही कारण है कि अब सुमन की गिरफ्तारी और आगे की पूछताछ की संभावना बढ़ गई है।

