Delhi Police Social Media Action: Delhi Police explaining legal action on objectionable social media posts under IT Act, BNS and BNSS in India.
Delhi Police Social Media Action: जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, दिल्ली पुलिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली पुलिस के सोशल मीडिया से जुड़े नियमों (Delhi Police Social Media Action) को लागू करने के उपायों के तहत, X, Facebook, Instagram और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजकर विवादित कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सवाल यह उठता है कि सरकार किसी पोस्ट को हटाने का आदेश कैसे देती है और इसके लिए क्या कानूनी प्रावधान हैं?
Read : LGBTQ+ से लिव-इन तक… मोहन भागवत ने समाज और Gen Z पर रखी बेबाक राय
सरकार के पास कंटेंट हटवाने का क्या अधिकार है?
भारत में, IT एक्ट, 2000 और IT नियम, 2021/2023 डिजिटल कंटेंट को नियंत्रित करते हैं। दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया से जुड़ी कार्रवाई (Delhi Police Social Media Action) के दौरान, अगर किसी पोस्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या कानून-व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है, तो केंद्र सरकार IT एक्ट की धारा 69A के तहत उसे ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है।
इसके अलावा, BNSS की धारा 94 के तहत, पुलिस सोशल मीडिया कंपनियों को खास पोस्ट हटाने और आरोपी की डिजिटल जानकारी, जैसे IP एड्रेस, मोबाइल नंबर और ईमेल एड्रेस देने का निर्देश दे सकती है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
सोशल मीडिया कंपनियां नोटिस मिलने के बाद क्या करती हैं?
सरकारी नोटिस मिलने पर, सोशल मीडिया कंपनियों की कानूनी और अनुपालन (compliance) टीमें सबसे पहले आदेश की वैधता की जांच करती हैं। अगर कंटेंट भारतीय कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे भारत में ब्लॉक (जियो-ब्लॉक) किया जा सकता है या गंभीर मामलों में पूरी तरह से हटाया जा सकता है।
अगर कंपनियां दिल्ली पुलिस के सोशल मीडिया निर्देशों (Delhi Police Social Media Action) के बारे में तय समय-सीमा के अंदर कार्रवाई नहीं करती हैं, तो IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा भी वापस ली जा सकती है। ऐसी स्थिति में, कंपनी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
क्या सरकार यूजर की पहचान भी पता कर सकती है? (Delhi Police Social Media Action)
हां। नए IT नियमों के तहत, गंभीर मामलों में और कोर्ट के आदेश या सक्षम सरकारी प्राधिकरण के निर्देश मिलने पर, सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से आरोपी के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है। यदि आवश्यक हो, तो जांच एजेंसियां ’फर्स्ट ओरिजिनेटर’ (वह व्यक्ति जिसने मूल रूप से संदेश भेजा था) की पहचान भी मांग सकती हैं, हालांकि यह प्रक्रिया संबंधित कानूनों और न्यायिक आदेशों के अधीन है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
आपत्तिजनक पोस्ट करने पर क्या हो सकती है सजा?
दिल्ली पुलिस के सोशल मीडिया से जुड़े नियमों (Delhi Police Social Media Action) के तहत, अगर किसी पोस्ट में मानहानि, सार्वजनिक शांति भंग करना, नफरत फैलाना या फेक प्रोफाइल के जरिए धोखाधड़ी जैसे आरोप शामिल हों, तो कई तरह के कानून लागू हो सकते हैं।
- BNS की धारा 356 के तहत मानहानि के मामलों में दो साल तक की जेल, जुर्माना या कम्युनिटी सर्विस की सजा हो सकती है।
- BNS की धारा 352 के तहत, जानबूझकर किसी का अपमान करने पर, जिससे शांति भंग हो, दो साल तक की सजा हो सकती है।
- अगर किसी पोस्ट से सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने या दुश्मनी फैलने जैसे आरोप लगते हैं, तो दूसरी संबंधित धाराएं भी लागू की जा सकती हैं।
- फेक पहचान या ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में IT एक्ट की धारा 66D लागू हो सकती है, जबकि अश्लील कंटेंट से जुड़े मामलों में धारा 67 का इस्तेमाल होता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मामला किस धारा के तहत दर्ज किया जाएगा, यह पोस्ट की प्रकृति, उसके असर और जांच एजेंसियों की जांच के नतीजों पर निर्भर करता है।
दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया एक्शन से मिला स्पष्ट संदेश – आखिरी का पालन करें (Delhi Police Social Media Action)
सोशल मीडिया अपनी बात कहने का एक अहम जरिया है, लेकिन इसके साथ कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। सोशल मीडिया को लेकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई (Delhi Police Social Media Action) से पता चलता है कि अगर किसी पोस्ट में कानून का उल्लंघन, हिंसा भड़काना, मानहानि या सजा-योग्य कोई और बात शामिल हो, तो सरकार और पुलिस कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए कार्रवाई कर सकते हैं। इसलिए, सोशल मीडिया पर कोई भी कंटेंट शेयर करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना और कानून का पालन करना जरूरी है।

