Gold and Silver Prices: सोना चांदी में आने लगी तेज रिकवरी, क्या आ गया फिर से खरीदारी का सही समय
Gold and Silver Price Recovery: पिछले कुछ दिनों की तेज गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती लौटती दिखाई दे रही है। एमसीएक्स पर सोने ने जिस तेजी से वापसी की है, उसने निवेशकों के बीच नई उम्मीद जगा दी है। बाजार के जानकारों का मानना है कि भले ही शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद के कारण लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है।
पिछले दो दिनों में एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया। सोमवार को सोना 1,47,878 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर था, जो बुधवार 4 फरवरी 2026 को बढ़कर 1,57,620 रुपये तक पहुंच गया। इस तरह मात्र दो दिनों में करीब 6.59 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। यह उछाल उस बड़ी गिरावट के बाद आया है, जब 29 जनवरी को सोना 1,75,231 रुपये के रिकॉर्ड स्तर से करीब 15.61 प्रतिशत तक टूट गया था। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट खत्म हो चुकी है और क्या दोबारा खरीदारी का सही मौका आ गया है।
Also Read: भारत-अमेरिका डील का असर, सोना चमका, चांदी ने तोड़ा अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड
गिरावट के बाद क्यों लौटी तेजी
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार डॉलर में कमजोरी आने से सोने को बड़ा सहारा मिला है। उनका कहना है कि हाल के सत्रों में अमेरिकी मुद्रा के नरम पड़ने से वैश्विक बाजार में सोने की मांग बढ़ी। घरेलू बाजार में रुपया थोड़ा मजबूत होने के कारण तेजी सीमित जरूर रही, लेकिन लगातार तीन सत्रों की भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने वैल्यू बाइंग शुरू कर दी, जिससे कीमतों में तेज रिकवरी देखने को मिली। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के विशेषज्ञ अमर राणु का मानना है कि सुरक्षित निवेश की मांग फिर से बढ़ने लगी है। भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका और पश्चिमी देशों की आर्थिक अनिश्चितता तथा आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं ने सोने को मजबूती दी है। निवेशक एक बार फिर सोने को जोखिम से बचने का सबसे सुरक्षित साधन मानने लगे हैं।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
क्या यह तेजी टिक पाएगी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह तेजी आगे भी बनी रहेगी या नहीं, यह कई बातों पर निर्भर करेगा। मानव मोदी का कहना है कि सबसे अहम यह देखना होगा कि हाल की गिरावट में बाजार से सट्टेबाजी वाले सौदे पूरी तरह निकल चुके हैं या नहीं। इसके अलावा एशियाई देशों खासकर भारत और चीन से भौतिक मांग कैसी रहती है, यह भी कीमतों की दिशा तय करेगी। रिद्धिसिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक और आईबीजेए के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद निकट भविष्य की अनिश्चितता कुछ कम हो सकती है। इससे सोने की सेफ-हेवन मांग पर थोड़ा दबाव आ सकता है और कीमतें कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं। हालांकि उनका कहना है कि मजबूत रुपया आयात लागत घटाकर घरेलू बाजार में सोने को थोड़ी राहत जरूर दे सकता है।
चीन फैक्टर भी निभा रहा अहम भूमिका
वैश्विक बाजार में चीन की मांग सोने की कीमतों के लिए बड़ा सहारा बनी हुई है। लूनर न्यू ईयर से पहले चीन के शेनझेन और शंघाई जैसे बड़े बाजारों में भौतिक सोने की खरीद काफी मजबूत रही है। हालांकि वहां की सरकार ने ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए गोल्ड निवेश उत्पादों पर नियंत्रण सख्त किया है, लेकिन इसके बावजूद खुदरा निवेशकों की रुचि कम नहीं हुई है।
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
लंबी अवधि में क्यों मजबूत रहेगा सोना
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी सोने की चमक बनी रह सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व का नरम रुख, वैश्विक स्तर पर बढ़ता कर्ज संकट, रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया का तनाव तथा सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद जैसे कारक सोने को मजबूत आधार दे रहे हैं। दुनिया के कई बड़े केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों को दीर्घकालिक समर्थन मिल रहा है। ईटीएफ में भी निवेश धीरे-धीरे लौटने लगा है। पिछले कुछ महीनों में गोल्ड ईटीएफ से निकासी जरूर हुई थी, लेकिन हालिया गिरावट के बाद फिर से निवेश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि बड़े संस्थागत निवेशक अब भी सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं।
उत्तराखंड की तमाम बड़ी खबर LIVE देखने के लिये क्लिक करे
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो
अमर राणु के अनुसार शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए एकमुश्त बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। हर गिरावट को मौके की तरह देखें और लंबी अवधि के नजरिये से पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बनाए रखें। पृथ्वीराज कोठारी का भी मानना है कि फिलहाल सोना एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है, लेकिन कुल मिलाकर रुझान तेजी का ही रहेगा। जो निवेशक पांच से दस साल की सोच के साथ निवेश करते हैं, उनके लिए सोना अब भी भरोसेमंद विकल्प है।
बाजार के जानकार सलाह देते हैं कि सोने के साथ चांदी पर भी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि औद्योगिक मांग बढ़ने से चांदी में भी अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सोना एक बार फिर अपनी पुरानी चमक की ओर लौट रहा है और समझदारी से किया गया निवेश आने वाले समय में बेहतर रिटर्न दे सकता है।

