Haryana Three-Pond System: हरियाणा में तालाबों की बदलेगी तस्वीर, अब सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं, गंदे पानी पर भी सख्त कार्रवाई, गांवों में लागू होगा थ्री-पॉन्ड सिस्टम
Haryana Three-Pond System: हरियाणा सरकार ने राज्य के तालाबों और जोहड़ों को केवल सुंदर बनाने तक सीमित न रखते हुए अब उन्हें वैज्ञानिक तरीके से विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि गांवों के तालाब अब गंदे पानी के ठिकाने नहीं बनने चाहिए। सरकार का लक्ष्य इन्हें जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है।
गांवों के तालाबों को मिलेगा नया जीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब और जोहड़ सिर्फ जल संग्रहण के साधन नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई गांवों में बढ़ती आबादी के कारण पुराने जोहड़ अब रिहायशी इलाकों के बीच आ गए हैं। ऐसे में उनकी नियमित सफाई और जल निकासी (Haryana Three-Pond System) बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में तालाबों की स्थिति का लगातार निरीक्षण किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनमें गंदा पानी जमा न हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गंदे तालाब ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं और इससे संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ती है।
पंचायतों को सौंपी जाएगी बड़ी जिम्मेदारी
सरकार अब तालाबों के रखरखाव में ग्राम पंचायतों की भूमिका को और मजबूत करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे तालाबों (Haryana Three-Pond System) की नियमित सफाई, जलभराव नियंत्रण और आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करें। इसके साथ ही अधिकारियों को पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि स्थानीय भागीदारी बढ़ने से तालाब संरक्षण अभियान ज्यादा प्रभावी होगा।
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हर गांव में लागू होगा थ्री-पॉन्ड सिस्टम
बैठक में सबसे अहम चर्चा गांवों में गंदे पानी के प्रबंधन को लेकर हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गांवों का गंदा पानी सीधे तालाबों में नहीं छोड़ा जाएगा। इसके लिए राज्यभर में ‘थ्री-पॉन्ड सिस्टम’ (Haryana Three-Pond System) लागू किया जाएगा। इस प्रणाली के तहत गंदे पानी को तीन अलग-अलग चरणों से गुजारा जाएगा। पहले चरण में ठोस कचरे को अलग किया जाएगा, दूसरे चरण में प्रदूषकों को कम किया जाएगा और तीसरे चरण में पानी को उपयोग योग्य बनाया जाएगा। उपचारित पानी का इस्तेमाल सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे तालाबों में प्रदूषण कम होगा और भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।
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मछली पालन से ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार
हरियाणा सरकार तालाबों (Haryana Three-Pond System) को ग्रामीण आय का स्रोत बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बड़े तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा दिया जाए। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को स्थानीय स्तर पर आय का साधन मिल सकेगा। सरकार इसके लिए ऑनलाइन ऑक्शन पोर्टल शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस पोर्टल के माध्यम से तालाबों की पारदर्शी बोली लगाई जाएगी, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और स्वयं सहायता समूहों तथा स्थानीय युवाओं को भी मौका मिलेगा।
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6,777 तालाबों की सफाई पूरी
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्यभर में अब तक 6,777 तालाबों की सफाई और पुनर्जीवन का कार्य पूरा किया जा चुका है। बाकी तालाबों पर भी तेजी से काम जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि सभी तालाबों को स्वच्छ, उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए ताकि भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिल सके। साथ ही ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता और जल प्रबंधन की स्थिति भी बेहतर हो सके।
ग्रामीण विकास के साथ जुड़ा जल संरक्षण मिशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन गांवों में बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारना है। तालाब संरक्षण अभियान इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि थ्री-पॉन्ड सिस्टम (Haryana Three-Pond System) प्रभावी तरीके से लागू होता है तो हरियाणा में जल संरक्षण की स्थिति मजबूत हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की बर्बादी कम होगी और सिंचाई के लिए वैकल्पिक जल स्रोत भी तैयार होंगे।

