India Defence Investment Decade: निर्मला सीतारमण ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए भारत के एक दशक से चल रहे रक्षा निवेश पर प्रकाश डाला।
India Defence Investment Decade: जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया, तो सदन में यह स्पष्ट संदेश गया कि यह सिर्फ किसी एक सैन्य कार्रवाई की बात नहीं है। यह उस दशकभर की रणनीतिक सोच, नीतिगत सुधार और आत्मनिर्भर रक्षा ढांचे का प्रतीक है, जिसे भारत ने पिछले 10 वर्षों में मजबूती से खड़ा किया है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की उस बदली हुई सैन्य मानसिकता का उदाहरण है, जहां देश अब केवल खतरे का जवाब देने वाला नहीं, बल्कि पहले से तैयार, तकनीकी रूप से सक्षम और निर्णायक शक्ति बन चुका है।
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बीते एक दशक में रक्षा निवेश की ऐतिहासिक छलांग
वित्त मंत्री ने बताया कि 2014 के बाद से रक्षा बजट में केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि दृष्टिकोण की वृद्धि हुई है। पहले जहां रक्षा खर्च का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर था, वहीं अब प्राथमिकता स्वदेशी उत्पादन, क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक निवेश पर है। रक्षा पूंजीगत व्यय में निरंतर बढ़ोतरी ने सेनाओं को आधुनिक बनाया, साथ ही देश के भीतर एक मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम को जन्म दिया।
‘मेक इन इंडिया’ से ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की छलांग
निर्मला सीतारमण ने रेखांकित किया कि मेक इन इंडिया (डिफेंस) अब केवल आत्मनिर्भरता का नारा नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा का आधार बन चुका है। आज भारत में बने लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम, आर्टिलरी गन, युद्धपोत और ड्रोन न केवल भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ा रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। रक्षा निर्यात में आई कई गुना वृद्धि इस बदलाव की गवाही देती है।
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ऑपरेशन सिंदूर – नई सैन्य सोच की झलक
ऑपरेशन सिंदूर को उदाहरण के रूप में रखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह अभियान स्वदेशी हथियार प्रणालियों, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सटीक रणनीति और तेज निर्णय क्षमता का परिणाम था। यह ऑपरेशन दर्शाता है कि भारत अब सिर्फ सैन्य संसाधन जुटाने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक आधारित युद्ध क्षमता विकसित कर चुका है।
रक्षा अनुसंधान में निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी
बीते दस वर्षों में DRDO के साथ-साथ निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और MSME की भूमिका अभूतपूर्व रही है। iDEX, SRIJAN और PLI जैसी योजनाओं ने रक्षा क्षेत्र को युवाओं और नवाचार से जोड़ा। वित्त मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में निवेश अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का बड़ा माध्यम बन गया है।
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वैश्विक मंच पर भारत की बदली हुई छवि
आज भारत को दुनिया केवल एक बड़ा हथियार आयातक नहीं, बल्कि विश्वसनीय रक्षा साझेदार के रूप में देख रही है। QUAD, इंडो-पैसिफिक और रणनीतिक साझेदारियों में भारत की भूमिका उसकी मजबूत सैन्य क्षमता से और सशक्त हुई है। यह बदलाव कूटनीतिक स्तर पर भारत की सौदेबाजी की ताकत को भी बढ़ाता है।
आर्थिक मजबूती का नया आधार
रक्षा निवेश ने अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है –
- लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
- MSME के लिए नए अवसर
- रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
वित्त मंत्री के अनुसार, रक्षा क्षेत्र अब राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास का इंजन बन चुका है।
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आगे की राह – आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर रहना नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा नेतृत्व की भूमिका निभाना है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे मिशन भविष्य की उस तस्वीर को दिखाते हैं, जहां भारत नीति, तकनीक और सैन्य शक्ति तीनों मोर्चों पर दुनिया को दिशा देने की क्षमता रखता है।

