Bijnor Leopard Rescue: जिसे समझा दुश्मन, वही निकला जंगल का रक्षक,तेंदुआ का चौंकाने वाला खुलासा
International Leopard Day: बचपन में जब हम गाँव में रात को परिवार के साथ आंगन में सोते थे, तो कभी-कभी यह हल्ला मचता था कि बघेरा घूम रहा है। उस समय हमारी माँ हमें अपने पास सुरक्षित सुला लेती थीं। तब हमें यह नहीं पता था कि बघेरा कैसा होता है, बस एक अनजाना डर मन में बैठ जाता था। धीरे-धीरे बड़े होने पर समझ आया कि यह बघेरा दरअसल टाइगर से छोटा एक वन्यजीव है, जिसे गुलदार या तेंदुआ कहा जाता है।
Also Read: दीदी ही जीतेंगी… बंगाल चुनाव से पहले अखिलेश यादव का बड़ा दावा
सेवा जीवन में गुलदार से सामना
जीवन में आगे चलकर इसी बघेरे से आमना-सामना भी हुआ। बिजनौर वन प्रभाग में तैनाती के दौरान एक घटना में गाँव वालों ने हमें बंधक बना लिया, क्योंकि उन्होंने एक व्यक्ति की मौत के लिए गुलदार को जिम्मेदार ठहराया था। कई घंटों की बातचीत के बाद हमें छोड़ा गया। बाद में जांच में पता चला कि वह हत्या थी, जिसे मुआवजा पाने के लिए गुलदार पर थोप दिया गया था। (International Leopard Day)
बिजनौर में रेस्क्यू अभियान का अनुभव
बिजनौर में तैनाती के दौरान कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जहां मानव और वन्यजीव के बीच टकराव हुआ। लगभग 3.5 वर्षों में 125 से अधिक तेंदुओं को रेस्क्यू कर सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। यह कार्य चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिली और एक संतोष का अनुभव हुआ।
Read : क्या बृजभूषण शरण सिंह बदलेंगे पार्टी? बेटे प्रतीक भूषण ने तोड़ी चुप्पी
तेंदुआ रहस्यमयी और मायावी जीव
तेंदुआ एक गुपचुप और मायावी प्राणी है। यह फेलिडे परिवार का सदस्य है और इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा पार्डस (Panthera pardus) है। भारतीय तेंदुआ (Panthera pardus fusca) पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है। यह घने जंगलों से लेकर रेगिस्तान और पहाड़ों तक हर प्रकार के वातावरण में खुद को ढाल लेता है, लेकिन इसे देख पाना बेहद मुश्किल होता है।
शारीरिक क्षमता और जीवनशैली
तेंदुआ बड़ी बिल्लियों में सबसे छोटा सदस्य है। इसकी लंबाई 3 से 6.25 फीट तक होती है और पूंछ 22 से 43 इंच तक लंबी होती है। नर का वजन 80-150 पाउंड और मादा का 60-100 पाउंड होता है। इसके शरीर पर काले धब्बे होते हैं जिन्हें रोजेट कहा जाता है। कभी-कभी यह पूरी तरह काला भी दिखाई देता है, जिसे ब्लैक पैंथर कहा जाता है।
पढ़े ताजा अपडेट: Newswatchindia.com: Hindi News, Today Hindi News, Breaking
मानव-गुलदार संघर्ष की सच्चाई
तेंदुआ मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक बड़ा कारण बन गया है। कई बार इसे गलत तरीके से खलनायक बना दिया जाता है। कुछ मामलों में लोग मुआवजा पाने के लिए झूठे आरोप भी लगा देते हैं। वहीं, जनाक्रोश के कारण कई बार तेंदुओं को मारने या जलाने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं।(International Leopard Day)
Latest News Update Uttar Pradesh News, उत्तराखंड की ताज़ा ख़बर
तेंदुओं पर बढ़ता संकट
तेंदुओं की संख्या अब कई जगहों पर घट रही है। इसका मुख्य कारण है जंगलों का खत्म होना, शिकार की कमी और अवैध शिकार। इनके प्राकृतिक आवास को कृषि भूमि में बदला जा रहा है, जिससे इनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है।
संरक्षण की चुनौती और भविष्य
IUCN के अनुसार तेंदुआ संवेदनशील श्रेणी में आता है। यदि समय रहते संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में इनकी संख्या और घट सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इंसान और तेंदुए के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि दोनों सुरक्षित रह सकें।

