Jaswant Singh Khalra Story: Diljit Dosanjh's upcoming film is based on the life and sacrifice of Jaswant Singh Khalra.
Jaswant Singh Khalra Story: दशकों पहले, पंजाब की नदियों में पानी के साथ-साथ एक और चीज़ बह रही थी और वो था इंसानी खून। एक ऐसा दौर, जहां सुबह घर से निकला युवा शाम को वापस आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं थी। पुलिस कस्टडी, एनकाउंटर और फिर… ‘लापता’। लेकिन इस खौफ के सन्नाटे के बीच, एक शख्स ऐसा था जिसने मौत की परवाह किए बिना सत्ता और बंदूक के सामने खड़े होने की हिम्मत दिखाई।
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नाम था जसवंत सिंह खालरा।
हाल ही में मशहूर सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ की एक फिल्म को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जो इसी जांबाज इंसान की सच्ची और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी पर आधारित है। आज की इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि आखिर जसवंत सिंह खालरा कौन थे?(Jaswant Singh Khalra Story) उन्होंने पंजाब पुलिस के किस काले राज का पर्दाफाश किया था? और कैसे एक दिन खुद उन्हें भी उसी खौफनाक अंजाम का सामना करना पड़ा, जिसके खिलाफ वो लड़ रहे थे।
कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
कहानी शुरू होती है 1990 के दशक की शुरुआत में। जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) कोई एक्टिविस्ट या राजनेता नहीं थे, बल्कि अमृतसर के एक बैंक में डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। एक सामान्य जीवन जीने वाले खालरा की जिंदगी तब बदल गई, जब उनके एक मानवाधिकार कार्यकर्ता मित्र अचानक लापता हो गए। अपने दोस्त की तलाश करते-करते वह अमृतसर के एक श्मशान घाट पहुंचे, जहां उन्हें ऐसी जानकारी मिली जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
श्मशान घाट के रजिस्टर में मिला सबसे बड़ा सुराग
श्मशान घाट के रजिस्टरों की जांच करते हुए जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) को एक बेहद चौंकाने वाला पैटर्न दिखाई दिया। रिकॉर्ड में दर्ज था कि पुलिस बड़ी संख्या में शवों को वहां लाकर अंतिम संस्कार कर रही थी और लगभग सभी शवों के सामने ‘लावारिस’ या ‘अज्ञात’ लिखा गया था। यहीं से उनके मन में सवाल उठा कि क्या ये वही युवक हैं, जिनकी तलाश में उनके परिवार दर-दर भटक रहे हैं?
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25 हजार कथित फर्जी एनकाउंटर और लावारिस शवों का दावा
जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) ने अमृतसर, तरनतारन और मजीठा के श्मशान घाटों का रिकॉर्ड जुटाया। दस्तावेजों, रजिस्टरों और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर उन्होंने दावा किया कि इन तीन जिलों में 25,000 से अधिक युवाओं को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से मारकर उनकी पहचान छिपाते हुए लावारिस बताकर अंतिम संस्कार किया गया।उन्होंने लकड़ी के बिल, श्मशान घाट के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के साथ अपनी रिपोर्ट तैयार की।
धमकियां मिलीं, लेकिन खालरा पीछे नहीं हटे
इतने बड़े आरोपों के बाद जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) को लगातार धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने भारत ही नहीं बल्कि कनाडा और अमेरिका जाकर भी मानवाधिकार मंचों पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
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6 सितंबर 1995… जब घर के बाहर से उठा लिए गए खालरा
सितंबर 1995 में विदेश यात्रा से लौटने के बाद भी उन्हें लगातार खतरे की चेतावनी मिलती रही। लेकिन उन्होंने देश छोड़ने से इनकार कर दिया। 6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से कुछ लोग उन्हें कथित तौर पर जबरन एक वाहन में बैठाकर ले गए। इसके बाद वह कभी अपने घर वापस नहीं लौटे।(Jaswant Singh Khalra Story)
CBI जांच और अदालत में सामने आए चौंकाने वाले दावे
जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) के लापता होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत के निर्देश पर CBI ने जांच शुरू की। बाद में एक पुलिसकर्मी ने सरकारी गवाह बनकर अदालत में बयान दिया कि खालरा को हिरासत में रखकर कथित रूप से प्रताड़ित किया गया। गवाह के अनुसार, बाद में उनकी हत्या कर शव को हरीके पत्तन क्षेत्र में नदी में फेंक दिया गया।
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कानूनी लड़ाई और दोषियों को सजा
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2005 और 2007 में अदालतों ने इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। आज जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) को मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले साहसी व्यक्तियों में याद किया जाता है।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म से फिर चर्चा में आए खालरा
हाल के दिनों में दिलजीत दोसांझ की आगामी फिल्म के कारण जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra Story) का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। फिल्म का उद्देश्य उनकी जिंदगी और मानवाधिकारों के लिए किए गए संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बताया जा रहा है।

