Jharkhand Politics: क्या बदलने वाली है झारखंड की सत्ता? सोरेन–बीजेपी नजदीकियों ने बढ़ाया सस्पेंस!

Jharkhand Politics: पिछले 24 घंटों में झारखंड की राजनीति में जिस तरह घटनाएं तेजी से बदलीं, उसने पूरे राज्य के साथ दिल्ली की राजनीति को भी चौकन्ना कर दिया। मंगलवार दोपहर तक सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन शाम होते होते राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया।
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हेमंत सोरेन–बीजेपी संपर्क की चर्चा और JMM का तुरंत खंडन
सब कुछ तब शुरू हुआ, जब सूत्रों से यह दावा सामने आया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन दिल्ली में हैं और वहां बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत चल रही है। यह खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई।
जेएमएम ने तुरंत बयान जारी करके इन दावों को ‘झूठा और भ्रामक’ बताया। पार्टी ने साफ कहा कि ऐसा कोई राजनीतिक संपर्क नहीं है और इस तरह की बातें जानबूझकर माहौल बिगाड़ने के लिए फैलाई जा रही हैं।
लेकिन फिर राज्यपाल का अचानक दिल्ली पहुंचना क्यों?
जेएमएम के खंडन के कुछ ही घंटे बाद झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार दिल्ली पहुंच गए। साथ ही, उनकी गृह मंत्री अमित शाह से हुई औपचारिक मुलाकात ने सियासी अटकलों को और ज्यादा हवा दे दी।
हालांकि आधिकारिक रूप से कहा गया कि राज्यपाल का दौरा ‘सामान्य प्रशासनिक चर्चा’ का हिस्सा है, लेकिन राजनीति में समय बहुत अहम माना जाता है। इस वजह से लोग इस दौरे को झारखंड की बदलती सियासत से जोड़कर देख रहे हैं।
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बीजेपी की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है
बीजेपी के केंद्रीय नेता इस पूरे मामले पर लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। यह चुप्पी राजनीतिक संकेतों को और मजबूत कर रही है क्या झारखंड में सत्ता का समीकरण बदलने वाला है?
क्योंकि बिहार चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद झारखंड में पार्टी का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है।
क्या झारखंड में सत्ता पलटने की तैयारी?
राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन पार्टियों जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के बीच पिछले कुछ हफ्तों से दूरी बढ़ती दिख रही है। इससे यह कयास और तेज हो गए कि अगर कांग्रेस और आरजेडी के साथ तालमेल बिगड़ता है, तो जेएमएम बीजेपी का हाथ पकड़ सकता है।
नीचे कुछ प्रमुख कारण हैं, जिनसे सत्ता बदलने की आशंका को बल मिला है:
- जेएमएम और कांग्रेस नेताओं का एक मंच पर न दिखना
कई बड़े कार्यक्रम हुए, लेकिन दोनों दलों के नेता एक साथ नहीं दिखाई दिए। यह गठबंधन में दरार का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
- बिहार चुनाव में JMM को सीट न मिलना
महागठबंधन की सीट शेयरिंग में झामुमो को कोई सीट नहीं दी गई। इससे दोनों दलों के रिश्तों में खटास और बढ़ी।
- योजनाओं के लिए केंद्र से बढ़ती आर्थिक मदद
राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे मैया सम्मान योजना के लिए केंद्र से फंड की मांग तेज हुई। इसे भी राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
- कांग्रेस नेतृत्व के विरोधाभासी बयान
राज्य कांग्रेस के कई नेताओं ने हाल में ऐसे बयान दिए, जो गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े करते हैं।
- मुख्यमंत्री का ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम से गायब रहना
हेमंत सोरेन कई महीनों से इस कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। अचानक कार्यक्रम कैंसिल होने से भी सवाल उठे।
- दुमका कार्यक्रम में कांग्रेस–RJD मंत्रियों की गैरमौजूदगी
फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में दोनों पार्टियों के मंत्री नहीं पहुंचे। यह भी मनमुटाव का संकेत माना गया।
- रांची के मोराबादी मैदान में पोस्टर विवाद
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के पोस्टरों से कांग्रेस और आरजेडी नेताओं की तस्वीरें गायब थीं। इसके बाद दोनों दलों में नाराजगी खुलकर सामने आई।
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अब सबकी निगाहें दिल्ली पर
राज्यपाल की अचानक दिल्ली यात्रा और अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक हलचल को अपने चरम पर पहुंचा दिया है।
हालांकि कोई भी नेता खुलकर कुछ नहीं बोल रहा, लेकिन सवाल तो वही हैं—
क्या झारखंड में सरकार बदलने वाली है?
क्या जेएमएम बीजेपी की नजदीकियां वाकई बढ़ रही हैं?
या फिर यह सब महज राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है?
फिलहाल, आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन यह साफ है कि झारखंड की राजनीति अगले कुछ दिनों में बड़ा मोड़ ले सकती है।

