Putin to visit India: दो दूतावास, Su-57 जेट… पुतिन के भारत दौरे में ये बड़े फैसले होने की उम्मीद

Putin to visit India: रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे को लेकर दिल्ली में चर्चा है। इसे सिर्फ एक फॉर्मल मीटिंग से कहीं ज्यादा, बल्कि दोनों देशों के बीच बदलते हालात, बढ़ते ट्रेड और स्ट्रेटेजिक रिश्तों को आकार देने में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरे में वर्कर मोबिलिटी से लेकर एनर्जी, डिफेंस कोऑपरेशन, ट्रेड डेफिसिट और नए डिप्लोमैटिक कदमों जैसे कई बड़े फैसलों को मंजूरी मिल सकती है।
भारत-रूस रिश्तों में एक नया पड़ाव
2000 में भारत के अपने पहले दौरे के बाद से यह पुतिन का 23वां सालाना समिट है। लेकिन इस बार माहौल अलग है। दोनों देशों के बीच इकोनॉमिक पार्टनरशिप तेजी से बढ़ रही है, रूस भारत को बड़े पैमाने पर फर्टिलाइजर, एनर्जी और कच्चा तेल बेच रहा है, जबकि भारत FTA के जरिए अपने प्रोडक्ट्स के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस की उम्मीद कर रहा है। दिल्ली में FICCI और रूसी इंस्टीट्यूशन्स द्वारा मिलकर ऑर्गनाइज़ किया गया इंडिया-रूस बिजनेस फोरम इस दौरे का एक बड़ा हाईलाइट होगा।
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दो नए कॉन्सुलेट, Su-57 पर बातचीत
भारत रूस में अपनी डिप्लोमैटिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। कजान और येकातेरिनबर्ग में नए कॉन्सुलेट खुलेंगे। इससे भारतीयों और वहां काम करने वाली कंपनियों को सीधा फायदा होगा। इस दौरे के दौरान डिफेंस कोऑपरेशन भी एक बड़ा एजेंडा होगा। Su-57 जैसे एडवांस्ड प्लेटफॉर्म सहित कई मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
MEA अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि भारत ने रूस-यूक्रेन विवाद में कभी भी बीच-बचाव की पेशकश नहीं की। भारत ने पुतिन के दौरे पर एक यूरोपियन एम्बेसडर के लिखे ऑप-एड को अनडिप्लोमैटिक बताया है और इस पर ध्यान दिया है। पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को विटकोव मामले पर भी जानकारी दे सकते हैं। पुतिन के दौरे के दौरान भारत में रशिया टुडे (RT) लॉन्च हो सकता है।
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भारतीय कामगारों के लिए एक नया रास्ता
भारत और रूस के बीच स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड वर्कर्स के लिए मोबिलिटी एग्रीमेंट का ड्राफ्ट फाइनल हो गया है। रूस अभी बड़ी संख्या में विदेशी वर्कर्स की तलाश में है, और यह एग्रीमेंट भारतीयों के लिए नए मौके खोलेगा। विदेश मंत्रालय ने भी विदेश में नौकरी ढूंढ रहे भारतीयों को कोई भी कॉन्ट्रैक्ट साइन करते समय सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। रूसी सेना में तैनात ज्यादातर भारतीय वापस आ गए हैं, और बाकी को भारत वापस लाने का प्रोसेस चल रहा है।
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तेजी से बढ़ रहा आर्थिक और व्यापारिक सहयोग
भारत-रूस ट्रेड का मेन फोकस अब दो मुद्दों पर है। पहला है रूस के साथ भारत के बढ़ते ट्रेड डेफिसिट को कम करना, और दूसरा है लंबे समय तक एनर्जी और फर्टिलाइजर सिक्योरिटी पक्का करना। रूस से फर्टिलाइजर इंपोर्ट भारत के लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है, और दोनों देशों की कंपनियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। एनर्जी ट्रेड पूरी तरह से कमर्शियल एग्रीमेंट पर आधारित है। अगर ग्लोबल सैंक्शन का माहौल बदलता है, तो कंपनियों को खुद फैसला करना होगा। रुपया-रूबल सेटलमेंट सिस्टम पहले से ही मौजूद है, जो दोनों देशों के बीच ट्रांजैक्शन में फ्लेक्सिबिलिटी देता है।

