CM Yogi News: एक नाम…और पूरी सियासत हिल गई! योगी के बयान से उठी बड़ी हलचल
Kalnemi controversy Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेले से शुरू हुआ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच का विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने इस आग में घी डालने का काम किया है। बिना किसी का नाम लिए ‘कालनेमी’ शब्द का इस्तेमाल करते ही सियासी गलियारों में भूचाल आ गया और इस बयान को सीधे तौर पर शंकराचार्य से जोड़कर देखा जाने लगा।
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माघ मेले से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा है, जहां शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव देखने को मिला था। 18 जनवरी को पुलिस और शंकराचार्य समर्थकों के बीच झड़प की खबर सामने आई, जिसके बाद से मामला लगातार तूल पकड़ता गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि संतों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
सीएम योगी का ‘कालनेमी’ वाला बयान
इसी विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ के एक कार्यक्रम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा,’एक सच्चे संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। हमें उन कालनेमी से सावधान रहना होगा जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं।’ सीएम योगी ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि इशारा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की ओर है।
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शंकराचार्य का पलटवार
मुख्यमंत्री के बयान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए वे किसी भी तरह के तंज और आरोपों का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने साफ शब्दों में दोहराया कि संत समाज के अपमान को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शंकराचार्य ने एक बार फिर 18 जनवरी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक संतों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारी माफी नहीं मांगते, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
केशव मौर्य का अलग रुख, बढ़ी चर्चाएं
जहां एक ओर मुख्यमंत्री योगी का रुख सख्त दिखाई दे रहा है, वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान चर्चा का विषय बन गया है। केशव मौर्य ने हाथ जोड़कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ‘पूज्य शंकराचार्य जी’ कहकर संबोधित किया और विनम्र भाषा में बात रखी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि क्या यह सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश है या फिर केशव मौर्य की संतों के प्रति निजी श्रद्धा।
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विपक्ष को मिला हमला करने का मौका
इस पूरे विवाद ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का बड़ा मौका दे दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव और कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर संतों के अपमान का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि जो सरकार खुद को संतों और सनातन धर्म की रक्षक बताती है, वही आज संतों को ‘राक्षस’ जैसे शब्दों से जोड़ रही है। विपक्षी दलों का दावा है कि इस तरह के बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।
आखिर कौन था कालनेमी?
मुख्यमंत्री योगी ने जिस कालनेमी का जिक्र किया, वह रामायण का एक प्रसिद्ध पात्र है। रामकथा के अनुसार कालनेमी एक मायावी दैत्य था और रावण का मित्र था। रावण के कहने पर उसने हनुमान जी को छलने की कोशिश की थी। कालनेमी ने साधु का भेष धारण कर हनुमान जी को भ्रमित करने का प्रयास किया, लेकिन अंत में उसकी चाल पकड़ी गई और वह मारा गया। इसी कारण कालनेमी को छल, कपट और भेष बदलकर धोखा देने का प्रतीक माना जाता है।
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कहां जाकर थमेगा यह विवाद?
फिलहाल ‘कालनेमी’ बयान को लेकर सियासी बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ शंकराचार्य अपने रुख पर अडिग हैं, तो दूसरी ओर सरकार भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रही। विपक्ष लगातार हमलावर है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या यह मामला संवाद से सुलझेगा या फिर राजनीति की आग में और भड़केगा?

