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Lashkar Financier Killed: लश्कर के फाइनेंसर अब्दुल रहमान की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या

पाकिस्तान के कराची में लश्कर-ए-तैयबा के फाइनेंसर अब्दुल रहमान की अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। रहमान आतंकी संगठन के लिए हवाला नेटवर्क और आर्थिक संसाधन जुटाने में अहम भूमिका निभा रहा था। इस हत्या को आतंकी गुटों की आपसी रंजिश या किसी गुप्त ऑपरेशन का हिस्सा माना जा रहा है।

Lashkar Financier Killed: पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक अहम फाइनेंसर अब्दुल रहमान की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे कराची में गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। अब्दुल रहमान लश्कर के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने और हवाला नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। इस हत्या को आतंकी संगठनों के बीच आपसी रंजिश या किसी गुप्त ऑपरेशन का हिस्सा माना जा रहा है।

कैसे हुई हत्या?

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला कराची के गुलशन-ए-इकबाल इलाके में हुआ, जहां अब्दुल रहमान अपनी गाड़ी में था। तभी दो अज्ञात हमलावर बाइक पर आए और उस पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। चश्मदीदों के मुताबिक, रहमान को तीन गोलियां लगीं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर वारदात के बाद फरार हो गए, और अब तक किसी संगठन ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है।

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अब्दुल रहमान कौन था?

अब्दुल रहमान लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख फाइनेंसर था और कई वर्षों से आतंकी संगठनों को हवाला के जरिए धन मुहैया कराता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में भी था और आतंकी गतिविधियों को आर्थिक मदद पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका थी।

रहमान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भी कई बार निगरानी रखी जा रही थी, और भारत समेत कई देशों की एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं। माना जा रहा है कि वह पाकिस्तान में ही रहकर लश्कर के लिए फंड इकट्ठा करता था और उसे आगे आतंकी गतिविधियों में लगाता था।

हत्या के पीछे क्या हो सकता है कारण?

अब्दुल रहमान की हत्या के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:

आतंकी संगठनों के बीच आपसी रंजिश: लश्कर-ए-तैयबा, तालिबान और अन्य आतंकी संगठनों के बीच अक्सर आर्थिक विवाद होते रहे हैं। संभव है कि यह हत्या किसी आंतरिक संघर्ष का नतीजा हो।

ISI या पाकिस्तानी एजेंसियों की साजिश: रहमान के पास कई महत्वपूर्ण जानकारी थी, जिससे वह पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरा बन सकता था। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी हत्या में पाकिस्तानी एजेंसियों का भी हाथ हो सकता है।

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विदेशी खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई: इस तरह की हत्याओं को देखकर यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी विदेशी एजेंसी ने इसे अंजाम दिया हो, ताकि लश्कर की आर्थिक व्यवस्था कमजोर हो जाए।

गैंगवार या निजी दुश्मनी: कराची में कई आपराधिक और आतंकी समूह सक्रिय हैं, जिनके बीच अक्सर टकराव होता रहता है। हो सकता है कि यह हमला किसी निजी दुश्मनी का नतीजा हो।

पाकिस्तान में बढ़ रही टारगेट किलिंग

पाकिस्तान में हाल के वर्षों में टारगेट किलिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, खासकर कराची और बलूचिस्तान में। कई आतंकी संगठन आर्थिक और वैचारिक मतभेदों के कारण आपस में ही एक-दूसरे के खिलाफ हमले कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब्दुल रहमान की हत्या यह संकेत देती है कि आतंकी संगठनों के भीतर भी संघर्ष गहराता जा रहा है और कुछ गुट आपसी टकराव के कारण एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।

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पाकिस्तानी एजेंसियों की प्रतिक्रिया

हत्या के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गई हैं, लेकिन अब तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस और खुफिया विभाग ने इलाके में लगे CCTV फुटेज की जांच शुरू कर दी है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।

हालांकि, पाकिस्तान में इससे पहले भी कई आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्याएं होती रही हैं, जिनका कभी कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना जताई जा रही है।

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भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने हमेशा पाकिस्तान पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। अब्दुल रहमान की हत्या के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस घटना पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय खुफिया सूत्रों का कहना है कि यह हत्या लश्कर के आतंकी ढांचे को कमजोर कर सकती है।

अब्दुल रहमान की हत्या ने एक बार फिर से पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चाहे यह हमला किसी आपसी गुटबाजी का नतीजा हो या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा, यह साफ है कि आतंकवाद का गढ़ माने जाने वाले पाकिस्तान में अब खुद आतंकी ही सुरक्षित नहीं रहे। इस घटना के बाद लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क पर भी इसका असर पड़ सकता है, जिससे उसकी फंडिंग और गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है।

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Written By। Mansi Negi । National Desk। Delhi

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