Maharashtra NDA Alliance: War of words intensifies between leaders, NDA alliance falling apart in Maharashtra
Maharashtra NDA Alliance: लोकसभा चुनाव 2024(Lok Sabha 2024) के नतीजों से बीजेपी (BJP) को काफी निराशा हुई है। हालांकि बीजेपी इस बार भी मोदी सरकार बनाने में मुकम्मल रही है। परिणाम आने के बाद से ही एनडीए (NDA) गठबंधन के बिखरने की खबरें सामने आ रही हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) मोदी कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी(National Lok Samta Party )के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra kushwaha) के एक सोशल मीडिया(Social media) पोस्ट से अंदाजा लगाया जा रहा है कि बिहार में एनडीए के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। यहाँ तक की लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन का भी कुछ यही हाल है । पहले एनसीपी ने केंद्रीय राज्य मंत्री पद का ऑफर ठुकरा दिया और अब उनके नेता भाजपा पर हमला कर रहे हैं। महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता छगन भुजबल ने भाजपा की कम सीटों पर हमला बोला है।
भुजवल ने की भाजपा की आलोचना
छगन भुजबल ने आरएसएस की पत्रिका ऑर्गेनाइजर में छपे एक लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा है । लेख में एनसीपी के साथ गठबंधन करने के लिए भाजपा की आलोचना की गई थी। भुजबल ने कहा कि भाजपा की आलोचना सही है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण जैसे कांग्रेस नेताओं को शामिल करना उचित नहीं था।
भाजपा पर तंज
एनसीपी (NCP) नेता ने कहा कि, “लोकसभा चुनाव में हमें 48 में से सिर्फ 4 सीटें मिलीं है । उन 4 सीटों में से 2 हमसे छीन ली गईं। रायगढ़ और बारामती की 2 सीटों में से हमने 1 सीट जीती। अब कोई कैसे कह सकता है कि हमने 48 सीटों पर चुनाव लड़ा और हमें सिर्फ 2 सीटें मिलीं?” इसके साथ ही उन्होंने कहा भाजपा उत्तर प्रदेश के जैसे अन्य राज्यों से भी हारी है। कभी किसी ने ये कल्पना नहीं कि थी की बीजेपी को उत्तर प्रदेश से इतनी कम सीटें मिलेंगी। इसलिए, अजित पवार गुट को दोष देना सही नहीं है।
जीत हुई तो आरएसएस की, हार हुई तो अजित पवार की’
राकांपा के युवा नेता सूरज चव्हाण ने कहा कि जब भाजपा अच्छा करती है तो श्रेय RSS को जाता है, लेकिन हार का दोष अजित पवार पर डाला जा रहा है।
इस पर जवाब देते हुए भाजपा एमएलसी प्रवीण दारकेकर ने कहा कि आरएसएस हम सबके लिए पिता समान है और उसके बारे में टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। बिना कुछ सोचें समझे सूरज चव्हाण को कुछ भी नहीं बोलना चाहिए।

