Meerut Police : मेरठ में दरोगा की करतूत, 50 हजार की रिश्वत लेते दलाल गिरफ्तार, दरोगा नाला कूदकर भागा!
Meerut Police Corruption: उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जनपद में कानून व्यवस्था और खाकी को शर्मसार करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मेरठ के ब्रह्मपुरी थाने की माधवपुरम पुलिस चौकी पर तैनात एक दरोगा (Sub-Inspector) ने भ्रष्टाचार की सभी हदें पार करते हुए संगीन मुकदमे से धाराएं हटाने के नाम पर मोटी रकम की मांग की थी। भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Team) की विशेष विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर दरोगा के निजी सहायक (प्राइवेट असिस्टेंट) को ₹50,000 की नकद रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। एंटी करप्शन टीम की इस अचानक हुई छापेमारी से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और फिल्मी सीन देखने को मिला, वह था खुद आरोपी दरोगा का मौके से भागना। विजिलेंस टीम को देखते ही आरोपी दरोगा वैभव कुमार (Vaibhav Kumar) के होश उड़ गए और वह पुलिस टीम को चकमा देने के लिए अपनी चौकी के पीछे बने गहरे नाले को लांघकर (कूदकर) रफूचक्कर हो गया। एंटी करप्शन की टीम ने काफी दूर तक दरोगा का पीछा भी किया, लेकिन वह भागने में सफल रहा। टीम ने दरोगा के पकड़े गए दलाल सहायक को हिरासत में लेकर तत्काल टीपी नगर थाने पहुंचाया, जहां दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
धारा हटाने के नाम पर दरोगा ने मांगी थी घूस
ब्रह्मपुरी पुलिस के इस काले कारनामे की इनसाइड स्टोरी बेहद चौंकाने वाली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, माधवपुरम चौकी क्षेत्र में कुछ दिनों पहले एक विवाद हुआ था, जिसमें पुलिस ने जानलेवा हमले (आईपीसी की धारा 307) के तहत केस दर्ज किया था। इसी मुकदमे के विवेचक (आईओ) दरोगा वैभव कुमार थे। दरोगा ने आरोपी पक्ष को राहत देने और केस से जानलेवा हमले की गंभीर धारा को हटाने के एवज में ₹50,000 की घूस मांगी थी। पीड़ित पक्ष इस रिश्वतखोरी के खिलाफ था, इसलिए उसने चुपके से इसकी लिखित शिकायत मेरठ की एंटी करप्शन टीम से कर दी।
विजिलेंस इंस्पेक्टर के नेतृत्व में बिछाया गया था जाल
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के तेजतर्रार इंस्पेक्टर मयंक अरोड़ा (Inspector Mayank Arora) के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। शिकायत की शुरुआती जांच सही पाए जाने के बाद टीम ने केमिकल युक्त नोटों के साथ पीड़ित को दरोगा के पास भेजा। दरोगा वैभव कुमार इतना शातिर था कि उसने खुद अपने हाथों से रकम न लेकर, सौदेबाजी के बाद पैसे कलेक्ट करने के लिए अपने प्राइवेट गुर्गे यानी निजी सहायक गौरव गर्ग (Gaurav Garg) को आगे कर दिया।
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असिस्टेंट जैसे ही गिनने लगा नोट
विजिलेंस टीम की पूरी प्लानिंग के तहत पीड़ित युवक पैसे देने माधवपुरम चौकी पहुंचा। जैसे ही दरोगा के इशारे पर उसका सहायक गौरव गर्ग चौकी से बाहर निकलकर सुनसान कोने में रिश्वत की ₹50,000 की गड्डी ले रहा था और नोटों को गिनने लगा, तभी सादे कपड़ों में चारों तरफ तैनात एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने जब उसके हाथ केमिकल वाले पानी से धुलवाए, तो उसके हाथ गुलाबी हो गए, जिससे घूस लेने का पुख्ता वैज्ञानिक सबूत मौके पर ही तैयार हो गया।
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पुलिस महकमे में हड़कंप
गौरव गर्ग को जैसे ही विजिलेंस टीम ने दबोचा और चौकी परिसर में हलचल बढ़ी, दरोगा वैभव कुमार को अपनी गलती और फंसने का अहसास हो गया। खुद को चारों तरफ से घिरता देख दरोगा वैभव कुमार ने आव देखा न ताव और अपनी वर्दी की परवाह किए बिना चौकी के पिछले हिस्से की तरफ दौड़ लगा दी। उसने बिना रुके पीछे बह रहे एक बड़े नाले की तरफ छलांग लगा दी और नाला कूदकर खेतों के रास्ते फरार हो गया। एसएसपी मेरठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फरार दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो विशेष टीमें गठित कर दी हैं।

