Russia Ukraine War News: न युद्ध रुकेगा, न होगी डील... यूक्रेन पर कब्जे की योजना साफ कर चुके पुतिन

Russia Ukraine War News: रुष और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की तमाम कोशिशें अब तक नाकाम साबित हुई हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार हमले बढ़ा रहे हैं और पश्चिमी देशों की ओर से युद्धविराम के लिए डाले जा रहे दबाव को नजरअंदाज कर रहे हैं। यहां तक कि अमेरिका की मध्यस्थता और वार्ता भी असरदार नहीं हो सकी है। विश्लेषक मानते हैं कि पुतिन की जिद सिर्फ मौजूदा युद्ध जीतने की नहीं, बल्कि 1991 में बिखर चुके सोवियत संघ
का खोया वर्चस्व दोबारा हासिल करने की है। यही वजह है कि वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते और धीरे-धीरे यूक्रेन के इलाकों पर कब्जा बढ़ा रहे हैं।
जेलेंस्की डील चाहते हैं, लेकिन पुतिन तैयार नहीं
वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की लगातार रूस के साथ शांति समझौता करने और युद्ध खत्म करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन पुतिन इसके लिए राज़ी नहीं। अमेरिका में हुई वार्ता के बाद भी उन्होंने हमले और तेज कर दिए। ट्रंप के सीजफायर वाले दावे को भी पुतिन ने नकार दिया और इसके बजाय ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी कर दी। विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन को लगता है यह समझौता उन्हें उनके लक्ष्य से भटका देगा।
1991 में बिखरा सोवियत साम्राज्य
1945 से 1991 तक सोवियत संघ एक महाशक्ति था, जो संयुक्त राज्य अमेरिका को टक्कर देता था। इसमें 15 रिपब्लिक शामिल थे, जिनमें यूक्रेन भी था। 1991 में आर्थिक बदहाली, अमेरिकी दबाव और आंतरिक विरोध के चलते सोवियत यूनियन टूट गया और 15 देश अलग हो गए। मिखाइल गोर्बाचेव ने इस्तीफा दे दिया और मास्को से कम्युनिस्ट झंडा उतर गया।
पुतिन ने अपनी आंखों से देखा रूस का पतन
उस दौर में व्लादिमीर पुतिन केजीबी के जासूस थे और जर्मनी के ड्रेसडेन शहर में तैनात थे। उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को एक होते और संयुक्त राज्य अमेरिका के पाले में जाते देखा। रूस लौटने पर वे एक टूटी हुई अर्थव्यवस्था, महंगाई और बेरोजगारी से जूझते देश में पहुंचे। पुतिन के लिए सोवियत यूनियन कोई असफल प्रयोग नहीं बल्कि गौरवशाली साम्राज्य था, जिसे वे फिर से खड़ा करना चाहते थे।
NATO का पूर्व की ओर बढ़ना पुतिन को धोखा लगा
पुतिन को सबसे ज्यादा नाराजगी NATO के विस्तार से है। जब सोवियत यूनियन टूटा था, तब पश्चिमी देशों ने भरोसा दिलाया था कि नाटो जर्मनी से आगे नहीं बढ़ेगा। लेकिन बाद में पोलैंड, हंगरी, चेक गणराज्य, लिथुआनिया, लातविया और एस्तोनिया जैसे देश नाटो में शामिल हो गए। 2022 तक 14 देश जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे या उसके प्रभाव में थे, नाटो में जा चुके थे। इससे पुतिन ने इसे रूस की घेरेबंदी माना।
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2014 से शुरू हुआ यूक्रेन संकट
2014 में यूक्रेन के रूस समर्थक राष्ट्रपति को हटाया गया, जिसके बाद पुतिन ने क्राइम पर कब्जा कर लिया और डोनबास में विद्रोहियों को समर्थन दिया। जब यूक्रेन ने यूरोपीय संघ और नाटो के करीब जाना शुरू किया तो पुतिन का गुस्सा भड़क उठा। फरवरी 2022 में उन्होंने ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के नाम पर यूक्रेन पर हमला कर दिया।
शांति वार्ताओं से ज्यादा युद्ध को लंबा खींचने की रणनीति
Donald Trump का दावा है कि वे 24 घंटे में युद्ध खत्म करवा सकते हैं, लेकिन पुतिन अब समझ चुके हैं कि ट्रंप जल्दबाजी में शांति बहाली का श्रेय लेना चाहते हैं। इसीलिए पुतिन बातचीत को लंबा खींच रहे हैं, वहीं डोनबास में धीरे-धीरे कब्जा बढ़ा रहे हैं। यूक्रेन को मिलने वाली पश्चिमी मदद भी अब कम हो रही है और संयुक्त राज्य अमेरिका भी खर्च से बचना चाहता है।
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ट्रंप को थकाने की रणनीति और शी जिनपिंग से नजदीकी
झी जिनपिंग के साथ तेल व्यापार में बढ़ती निकटता, नागरिकों पर बमबारी, पोलैंड पर ड्रोन से धमकी ये सब पुतिन की वही रणनीति मानी जा रही है जिससे वे ट्रंप को थका दें। अगर यूक्रेन झुक गया तो जॉर्जिया और मोलदोवा जैसे देश भी पश्चिम से दूरी बना लेंगे और पुतिन 1991 में टूटी सोवियत यूनियन को दोबारा खड़ा करने की अपनी ‘कसम’ पूरी कर सकेंगे।

