Kartavya Path Rehearsal: ठंड और प्रदूषण के बीच कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के जवान 77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए पूर्वाभ्यास कर रहे हैं।
Kartavya Path Rehearsal: दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल पूरे शबाब पर है। सुबह की कंपकंपा देने वाली ठंड, घना कोहरा और जहरीली हवा भी भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों के जवानों के हौसले को डिगा नहीं सकी। हर दिन तड़के शुरू होने वाला यह अभ्यास केवल एक परेड की तैयारी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा, अनुशासन और बलिदान की जीवंत मिसाल बन चुका है।
कई किलोमीटर तक फैले कर्तव्य पथ पर जवान पूरे जोश और अनुशासन के साथ अभ्यास करते नजर आते हैं। उनके कदमों की एकरूपता, चेहरों पर आत्मविश्वास और आंखों में देशभक्ति की चमक साफ संदेश देती है कि भारत की सुरक्षा मजबूत हाथों में है।
जहरीली हवा और ठंड भी नहीं डिगा पाईं हिम्मत
दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता और कड़ाके की सर्दी आम लोगों के लिए चुनौती बन जाती है, लेकिन देश की रक्षा में तैनात जवानों के लिए यह केवल एक और परीक्षा है। घंटों तक खुले मैदान में खड़े रहकर अभ्यास करना, भारी हथियारों और वर्दी के साथ मार्च करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद जवान पूरे मनोयोग और समर्पण के साथ अभ्यास कर रहे हैं। मास्क पहनकर, अनुशासन में बंधे और सटीक तालमेल के साथ वे यह साबित कर रहे हैं कि राष्ट्रसेवा के आगे कोई भी कठिनाई मायने नहीं रखती।
अनुशासन, एकता और समर्पण की मिसाल
रिहर्सल के दौरान सेना की टुकड़ियां जब सटीक कदमताल के साथ आगे बढ़ती हैं, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग जाता है। हर सलामी, हर मोड़ और हर गठन भारतीय सैन्य परंपरा की गरिमा को दर्शाता है। यह अभ्यास न केवल जवानों की शारीरिक क्षमता को दिखाता है, बल्कि उनके मानसिक अनुशासन और टीमवर्क की भी झलक देता है। 26 जनवरी को यही दृश्य जब पूरी भव्यता के साथ सामने आएगा, तो करोड़ों भारतीयों के दिल गर्व से भर जाएंगे।
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आधुनिक हथियार और रक्षा प्रणालियों की ताकत
77वें गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल में भारतीय सेना की आधुनिक सैन्य शक्ति भी प्रमुख आकर्षण है। अत्याधुनिक टैंक, मिसाइल सिस्टम, रडार तकनीक और स्वदेशी रक्षा उपकरण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता को दर्शाते हैं।
ये हथियार न केवल भारत की बढ़ती सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी संदेश देते हैं कि देश अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बन चुका है और किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम है।
सांस्कृतिक विविधता का रंगारंग संगम
गणतंत्र दिवस परेड केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव भी है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां देश की लोकसंस्कृति, परंपराओं और विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेंगी।
रिहर्सल के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार लोकनृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों का अभ्यास करते नजर आए। यह दृश्य ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करता है।
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यूरोप के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी, बढ़ता कूटनीतिक कद
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की एक बड़ी विशेषता यह है कि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। दो शीर्ष यूरोपीय नेताओं की उपस्थिति भारत-यूरोप रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का स्पष्ट संकेत है। यह भारत की वैश्विक कूटनीति में बढ़ती भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके प्रभाव को भी दर्शाता है।
वैश्विक मंच पर भारत का मजबूत संदेश
गणतंत्र दिवस परेड के जरिए भारत दुनिया को यह संदेश देगा कि वह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करता है, बल्कि सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से भी एक सशक्त राष्ट्र है। यह आयोजन भारत की स्थिरता, नेतृत्व क्षमता और भविष्य की दिशा को दर्शाने का एक प्रभावी मंच बनता जा रहा है।
26 जनवरी – गर्व, प्रेरणा और एकता का उत्सव
कर्तव्य पथ पर हो रही यह रिहर्सल उन करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सैनिकों के साहस, त्याग और बलिदान पर गर्व करते हैं। 26 जनवरी को जब यह परेड अपने पूर्ण स्वरूप में देश और दुनिया के सामने आएगी, तब यह केवल एक सरकारी समारोह नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रभक्ति, एकता और आत्मसम्मान का भव्य उत्सव बनेगा।

