Sanjay Raut slams Government: संजय राउत ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए और संवैधानिक चिंताओं को उठाते हुए मीडिया को संबोधित किया।
Sanjay Raut slams Government: एसएस-यूबीटी सांसद संजय राउत ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। इस बार उनके निशाने पर न सिर्फ सरकार रही, बल्कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक बयान को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। राउत ने सरकार को ‘पाखंडी और झूठी’ करार देते हुए कहा कि सत्ता संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है।
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संजय राउत का बयान – क्यों भड़का राजनीतिक तूफान
एसएस-यूबीटी (शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘मेरी सरकार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। राउत के अनुसार, राष्ट्रपति का पद संवैधानिक रूप से निष्पक्ष होता है और उसे किसी भी सरकार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है, जो बेहद खतरनाक संकेत है।
संविधान और राष्ट्रपति की भूमिका पर उठे सवाल
संजय राउत ने कहा कि भारतीय संविधान राष्ट्रपति को देश का प्रथम नागरिक मानता है, न कि किसी एक पार्टी या सरकार का प्रतिनिधि। उन्होंने कहा, ‘अगर राष्ट्रपति खुद को सरकार का हिस्सा बताने लगें, तो फिर लोकतंत्र का संतुलन कैसे बचेगा?’
राउत ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राष्ट्रपति भवन तक को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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सरकार पाखंडी और झूठी – राउत का सीधा आरोप
अपने बयान में संजय राउत ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि यह सरकार सिर्फ राष्ट्रवाद और संविधान की बात करती है, लेकिन व्यवहार में उसके ठीक उलट काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि जनता के सामने एक चेहरा और सत्ता के गलियारों में दूसरा चेहरा दिखाना ही इस सरकार की असली पहचान बन चुकी है।
विपक्ष का हमला, सत्ता पक्ष की बढ़ी मुश्किलें
संजय राउत के बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि संवैधानिक पदों की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है।
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क्या यह बयान आगामी चुनावों की रणनीति है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय राउत का यह हमला सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों से पहले विपक्ष की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है। लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए मजबूत हथियार साबित हो सकते हैं।
जनता के बीच क्या संदेश गया?
इस बयान ने आम जनता के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग राउत के बयान को लोकतंत्र की रक्षा की आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रहे हैं।

