Uttarakhand Railway News: उत्तराखंड में रेलवे का महाविस्तार, 26 गुना बढ़ा बजट, खुलेंगे विकास के ट्रैक
Uttarakhand Railway Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 में भारतीय रेलवे को 2.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जिसमें उत्तराखंड के हिस्से में 4,769 करोड़ रुपये आए हैं। यह राशि पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक है और राज्य में चल रहे रेलवे प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार देने वाली है। अभी उत्तराखंड में 39,491 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पहले से प्रगति पर हैं, जिनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का आधुनिकीकरण और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है। केंद्र सरकार का यह निवेश साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड को आने वाले वर्षों में एक प्रमुख रेलवे हब के रूप में विकसित करने की योजना है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां कनेक्टिविटी हमेशा चुनौती रही है, लेकिन इस बड़े बजट से वह कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है। रेल नेटवर्क मजबूत होने से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी सीधा लाभ मिलेगा।
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26 गुना बढ़ा बजट, बदलेगी राज्य की तस्वीर
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक 2009 से 2014 के बीच उत्तराखंड को रेलवे के लिए औसतन सिर्फ 187 करोड़ रुपये मिलते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 4,769 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 26 गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी है, जो राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही। इतने बड़े निवेश से न केवल नए ट्रैक बिछाए जाएंगे बल्कि पुराने स्टेशनों का कायाकल्प भी होगा। देहरादून, हरिद्वार, काठगोदाम जैसे प्रमुख स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है ताकि यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिल सकें। सरकार का फोकस सिर्फ ट्रेनों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सुरक्षित और आरामदायक यात्रा अनुभव देने पर भी है। यही वजह है कि बजट में टेक्नोलॉजी और सेफ्टी सिस्टम पर खास ध्यान दिया गया है।
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अमृत स्टेशन योजना से बदलेगा सफर का अनुभव
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत उत्तराखंड के 11 स्टेशनों को पूरी तरह नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्टेशनों पर आधुनिक वेटिंग लाउंज, बेहतर प्लेटफॉर्म, डिजिटल टिकटिंग, लिफ्ट-एस्केलेटर और स्मार्ट पार्किंग जैसी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। लगभग 147 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस काम का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देना है। अभी तक पहाड़ी राज्यों के स्टेशन बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते रहे हैं, लेकिन इस योजना के बाद स्थिति पूरी तरह बदलने वाली है। खासतौर पर चारधाम यात्रा पर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। स्टेशन केवल ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं, बल्कि मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किए जा रहे हैं।
100% विद्युतीकरण और वंदे भारत का विस्तार
उत्तराखंड ने रेलवे नेटवर्क में 100 फीसदी इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि है। 2014 से अब तक 334 किलोमीटर रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया जा चुका है और लगभग 76 किलोमीटर नए ट्रैक भी बनाए गए हैं। इलेक्ट्रिफिकेशन से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है, डीजल पर निर्भरता घटी है और प्रदूषण में भी कमी आई है। राज्य में इस समय 3 वंदे भारत एक्सप्रेस और 1 अमृत भारत एक्सप्रेस चल रही है, जिससे दिल्ली और अन्य बड़े शहरों से उत्तराखंड की दूरी समय के लिहाज से काफी कम हो गई है। हाईस्पीड ट्रेनों के आने से पर्यटन उद्योग को नया बूस्ट मिला है और वीकेंड टूरिज्म में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग परियोजना बनेगी गेमचेंजर
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक बन रही रेल लाइन उत्तराखंड की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है। कठिन पहाड़ी भूगोल, लंबी सुरंगों और बड़े पुलों के कारण यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन अब काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस रेल मार्ग के शुरू होने से गढ़वाल क्षेत्र सीधे देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। चारधाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह लाइन किसी वरदान से कम नहीं होगी। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पहाड़ों से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की दिशा बदल देगा।
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2026-27 में खुलेगा पहला फेज, पीएम करेंगे उद्घाटन
रेल मंत्री के अनुसार पूरी संभावना है कि इसी साल ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना के पहले फेज को चालू कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा सकते हैं और 2027 के अंत तक पूरी लाइन को ऑपरेशनल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रेल मार्ग के शुरू होते ही पहाड़ी जिलों की कनेक्टिविटी कई गुना बेहतर हो जाएगी। सड़क मार्ग पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रा सुरक्षित व तेज बनेगी। उत्तराखंड के लिए यह सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि विकास का नया द्वार है। बजट 2026 ने साफ कर दिया है कि आने वाले दो साल राज्य में रेलवे क्रांति के साल साबित होने वाले हैं।

